इफ्तार करने की दुआ (sunnat) सुन्नत से साबीत नही है
इफ्तार करने की दुआ
(sunnat) सुन्नत
से साबीत नही है
सिर्फ
बिस्मिल्लाह करके इफ्तार शुरू करे
इफ्तार
के बाद की दुआ
َھَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوْقُ وَثَبَتَ الْاَجْرُ اِنْ شَآئَ اللّٰہُ
ज़ह्बज्ज़मा वाब्ताल्लातिलुरुकु व सबतल अजरो इन श अल्लाह
दुआ
की मीनिंग (प्यास चली गयी और रागे तर हो गयी और अगर अल्लाह ने चाहा तो अजर साबित
हो गया )
(Abudawood
2357)
(👉 हर
बात
दलील
के
साथ)
Comments
Post a Comment