रोज़े की नियत का क्या मामला है
रोज़े की नियत का क्या मामला है
👉 ज़बान
से नियत करने का कोई सुबूत न तो खुद रसूलुल्लाहﷺ से साबित है और न ही
किसी सहाबी तबीई वगैरा से।ये सच है की अमल की बुनियाद नियत होती है
[ सहीह अल बुखारी : 1 ]
रोज़ा
की नियत की दुआ का कोई सुबूत कुरान
और सही हदीस से नहीं मिलता है दीन में कोई भी नई चीज़ शामिल करना बिदत है और करने
वाला मरदूद है
👉 रसूल
अल्लाह
ﷺ ने
फ़रमाया :- जिसने हमारे इस दीं में कुछ ऐसी बात
शामिल की जो उसमे से नहीं है तो वो मरदूद है
[ सहीह अल
बुखारी : 2697 ]
(👉 हर
बात
दलील
के
साथ)
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