ग़ुस्ल वाजिब (नापाक हो जाने पर ) होने की हालत में बिना ग़ुस्ल सेहरी करने में कोई हर्ज नहीं है


ग़ुस्ल वाजिब (नापाक हो जाने पर ) होने की हालत में बिना ग़ुस्ल सेहरी करने में कोई हर्ज नहीं है
*लेकिन फज्र की नमाज़ के लिए ग़ुस्ल ज़रूर कर लिया जाए.
📚(Bukhari h# 1925, 1926)
 (👉 हर बात दलील के साथ)

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