फितना ए इन्कारे ह़दीस़* *➖➖➖➖* ❈ *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* ❈ *JP🖌__________________________*
' *फितना ए इन्कारे ह़दीस़*
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❈ *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* ❈
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*पोस्ट 3⃣*
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*अल्लाह तआ़ला ने फ़रमाया:*
*سَیَقُوۡلُ السُّفَہَآءُ مِنَ النَّاسِ مَا وَلّٰىہُمۡ عَنۡ قِبۡلَتِہِمُ الَّتِیۡ کَانُوۡا عَلَیۡہَا ؕ قُلۡ لِّلّٰہِ الۡمَشۡرِقُ وَ الۡمَغۡرِبُ ؕ یَہۡدِیۡ مَنۡ یَّشَآءُ اِلٰی صِرَاطٍ مُّسۡتَقِیۡمٍ ﴿۱۴۲﴾*
*وَ کَذٰلِکَ جَعَلۡنٰکُمۡ اُمَّۃً وَّسَطًا لِّتَکُوۡنُوۡا شُہَدَآءَ عَلَی النَّاسِ وَ یَکُوۡنَ الرَّسُوۡلُ عَلَیۡکُمۡ شَہِیۡدًا ؕ وَ مَا جَعَلۡنَا الۡقِبۡلَۃَ الَّتِیۡ کُنۡتَ عَلَیۡہَاۤ اِلَّا لِنَعۡلَمَ مَنۡ یَّتَّبِعُ الرَّسُوۡلَ مِمَّنۡ یَّنۡقَلِبُ عَلٰی عَقِبَیۡہِ ؕ وَ اِنۡ کَانَتۡ لَکَبِیۡرَۃً اِلَّا عَلَی الَّذِیۡنَ ہَدَی اللّٰہُ ؕ وَ مَا کَانَ اللّٰہُ لِیُضِیۡعَ اِیۡمَانَکُمۡ ؕ اِنَّ اللّٰہَ بِالنَّاسِ لَرَءُوۡفٌ رَّحِیۡمٌ ﴿۱۴۳﴾*
*قَدۡ نَرٰی تَقَلُّبَ وَجۡہِکَ فِی السَّمَآءِ ۚ فَلَنُوَلِّیَنَّکَ قِبۡلَۃً تَرۡضٰہَا ۪ فَوَلِّ وَجۡہَکَ شَطۡرَ الۡمَسۡجِدِ الۡحَرَامِ ؕ وَ حَیۡثُ مَا کُنۡتُمۡ فَوَلُّوۡا وُجُوۡہَکُمۡ شَطۡرَہٗ ؕ وَ اِنَّ الَّذِیۡنَ اُوۡتُوا الۡکِتٰبَ لَیَعۡلَمُوۡنَ اَنَّہُ الۡحَقُّ مِنۡ رَّبِّہِمۡ ؕ وَ مَا اللّٰہُ بِغَافِلٍ عَمَّا یَعۡمَلُوۡنَ ﴿۱۴۴﴾*
अनक़रीब नादान लोग कहेंगे कि जिस कि़ब्ले पर थे उस से उन्हें किस चीज़ ने हटाया ? आप कह दीजिए कि मशरिक़ और मगरिब का मालिक अल्लाह ही है, वो जिसे चाहें सीधी राह की हिदायत कर दे। हम ने इसी तरह तुम्हें अफ़ज़ल उम्मत बनाया है। ताकि तुम लोगों पर गवाह हो जाओ। और रसूल *ﷺ* तुम पर गवाह हो जाएं। जिस कि़ब्ले पर तुम पहले से थे उसे हम ने सिर्फ इसी लिए मुकर्रर किया था कि हम देख ले कि रसूल का सच्चा ताबेदार कौन है और कौन है जो अपनी एड़ियों के बल पलट जाता है। गो ये काम मुश्किल है, मगर जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी है *उन पर कोई मुश्किल नहीं* अल्लाह तआ़ला तुम्हारा ईमान जा़ए ना करेगा। यक़ीनन अल्लाह लोगों के साथ शफ़क़्क़त और महरबानी करने वाला है। हम आप के चेहरे को बार बार आसमान की तरफ उठता देख रहे हैं, अब आप को हम उस कि़ब्ले की तरफ मुतवज्जा करेंगे जिसे आप पसंद करते हैं, आप अपना मूंह मस्जिदें हराम की तरफ फेर लें आप जहां कहीं हो अपना मूंह उसी तरफ फेरा करें। अहले किताब को इस बात के अल्लाह की तरफ से होने का यकी़नी इल्म है। और अल्लाह उन आमाल से गा़फिल नहीं जो ये करते हैं।
*Surat No 2 : Ayat No 142,143,144*
*सूरह अल बक़राह 142,143,144*
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