दरगाह और आस्तानो की हक़ीक़त*
दरगाह और आस्तानो की हक़ीक़त*
*जिसने किसी क़ौम की मुशाबहत इख्तेयार की तो वह उन्हीं में से होगा*
*( दरगाह पर किये जाने वाले कामों मे और ग़ैर क़ौमों के इबादत खानों मे किए जाने वाले कामों मे मुशाबहत पायी जाती है )*
➖➖➖➖➖➖
( 1 ) हज़रते इब्ने उमर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( मन् तशब्बहा बिक़ौमिन फहुआ मिन्हुम )
जिसने किसी क़ौम से मुशाबहत इख्तेयार की तो वह उन्हीं मे से हुआ ।
सुनन अबू दाऊद , बाब फी लुब्सिश शुहरति , किताबुल लिबास, हदीस नम्बर 4031
तखरीज -हसन
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों को पक्की बनाना, क़ब्रों पर मुजावर बन कर बैठना , क़ब्रों के ऊपर इमारत बनाना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 2 ) हज़रते जाबिर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है उन्होंने कहा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने मना फरमाया कि क़ब्र पर चूना लगाया जाय और उस पर बैठा जाय और उस पर इमारत बनाई जाय ।
सही मुस्लिम किताबुल जनायज़, हदीस नम्बर 970 ( 2244 )
तखरीज -सुनन निसाई 2026
सुनन इब्ने माजह 1563
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों को सज्दह गाह या दरगाह बनाने वालों पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने लानत फरमाई है*
➖➖➖➖➖➖
( 3 ) हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( कातलल्लाहुल् यहूदत्तख़ज़ू क़ुबूरा अम्बियाइहिम मसाजिद )
यहूदियों पर अल्लाह की लानत हो उन्होंने अपने अम्बिया की क़ब्रों को मसाजिद बना लिया ।
सही बुखारी , किताबुस्सलात, हदीस नम्बर 437
तखरीज -सही मुस्लिम 1185
सुनन अबू दाऊद 3227
➖➖➖➖➖➖
*बअज़ लोग कहते है कि क़ब्रों को ज़मीन के बराबर करने वाली हदीस मुशरिकीन के बारे में है , उसका जवाब*
➖➖➖➖➖➖
( 4 ) षुमामह बिन शुफ्फै ने बयान किया कहा हम सर ज़मीन ए रूम के जज़ीरह रोदस मे फज़ालह बिन उबैद रज़ियल्लाहो ताला अन्ह के साथ थे कि
हमारा एक दोस्त वफात पा गया , हज़रते फज़ालह बिन उबैद रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने उनकी क़ब्र के बारे में हुक्म दिया तो उसको बराबर कर दिया गया
फिर उन्होंने कहा मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से सुना है कि
आप इनको बराबर करने का हुक्म देते थे ।
सही मुस्लिम किताबुल जनायज़, हदीस नम्बर 968 ( 2242 )
तखरीज -सुनन अबूदाऊद 3219
सुनन निसाई 2029
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों को बुत बनाना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 5 ) अता बिन यसार से रिवायत है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( अल्लाहुम्मा ला तज्अल क़बरी वसनन युअबदुश्तद्दा )
ऐ मेरे परवरदिगार मेरी क़ब्र को बुत मत बनाना कि लोग उसको पूजें
( ग़ज़बल्लाहि अला क़ौमित्तख़ज़ु क़ुबूरा अम्बिया इहिम मसाजिद )
बहुत बड़ा ग़ज़ब अल्लाह का उन लोगों पर है जिन्होंने अपने पैगम्बरों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया ।
मोता इमाम मालिक , किताब क़स्र अस सलात फिस्सफर , हदीस नम्बर 412 ( आन लाइन बुक )
हदीस नम्बर 410( तखरीज शुदा )
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों वाले के नियाज़ का खाना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 6 ) तुम पर मुरदार और खून और सुअर का गोश्त और हर वह चीज़ जिस पर अल्लाह के सिवा दोसरे का नाम पुकारा गया हो हराम है फिर जो मजबूर हो जाय और वह हद से बढ़ने वाला और ज़्यादती करने वाला न हो उस पर उनके खाने में कोई गुनाह नहीं , अल्लाह तआला बख्शिश करने वाला मेहरबान है ( 173 )
सूरह अल बक़रह सूरह नम्बर 2 आयत नम्बर 173
➖➖➖➖➖➖
*मक्खी का चढ़ावा देने की वजह से जहन्नुम मे जाना*
➖➖➖➖➖➖
( 7 ) सैय्यिदिना सलमान रज़ियल्लाहो ताला अन्ह फरमाते हैं एक शख्स मक्खी की वजह से जन्नत मे जा पहुँचा और एक जहन्नुम मे चला गया, लोगों ने अर्ज़ किया यह कैसे ?
तो फरमाया कि 2 शख्स चले चलते -चलते एक बुत परस्त क़ौम के पास से गुज़रे जो किसी मुसाफिर को उनके बुत पर कुछ भेंट चढ़ाए बगैर नहीं गुज़रने देते थे चुनाँचे उन्होंने एक को कहा हमारे बुत के यहाँ कुछ चढ़ावा चढ़ाओ , उसने कहा कि मेरे पास कोई चीज़ नहीं, उन्होंने कहा तुम्हें यह ज़रूर करना होगा , अगर चे एक मक्खी ही क्यों न हो पस उसने मक्खी क़ुर्बान कर दी और उसकी जान बच गयी लेकिन वह जहन्नुम मे दाखिल हुआ
दूसरे को भी ऐसा ही कहा तो उसने जवाब दिया कि मैं ग़ैरुल्लाह के नाम पर कोई भी चीज़ चढ़ावा नहीं चढ़ा सकता उसको उन्होंने शहीद कर दिया , तो वह जन्नत मे जा पहुँचा ।
किताबुज़ज़ोहद लिल इमाम अहमद, सफा 33 , रक़म 84
हिल्यतुल् औलिया, 262/1 , रक़म 646
तखरीज -मौक़ूफ सही
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों पर जानवर ज़िबह करना या मुर्गा ज़िबह करना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 8 ) हज़रते अनस रज़ियल्लाहो ताला अन्ह बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( ला अक़्रा फिल्इस्लामि )
इस्लाम मे अक़्र नहीं है
इमाम अब्दुर्रज़्ज़ाक़ रहमतुल्लाह अलैह ने बयान किया कि
लोगों का मअमूल था कि वह क़ब्र के पास गाय व बकरी वग़ैरह ज़िबह करते थे ।
सुनन अबू दाऊद , किताबुल जनायज़, हदीस नम्बर 3222
तखरीज -इस्नादह सही
सही इब्ने हिब्बान हदीस नम्बर 738
➖➖➖➖➖➖
*दुआ ही अस्ल इबादत इसलिए क़ब्रों मे मद्फून हस्तियों से दुआ करना शिर्क है*
➖➖➖➖➖➖
( 9 ) हज़रते नोमान बिन बशीर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( अद्दुआओ हियल्इबादतु )
दुआ इबादत ही है
तुम्हारे रब ने फरमाया
( अद्ऊनी अस्तजिब् लकुम -सूरह ग़ाफिर आयत नम्बर 60 )
मुझे पुकारो मैं क़ुबूल करूँगा ।
सुनन अबू दाऊद, किताब अल वित्र, हदीस नम्बर 1479
तखरीज -इस्नादह सही
सुनन इब्ने माजह 3828
जामेअ तिर्मिज़ी 2969
➖➖➖➖➖➖
*सबसे बड़ा गुनाह शिर्क करना है*
➖➖➖➖➖➖
( 10 ) हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने बयान किया कि मैंने नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से पूछा कि कौन सा गुनाह अल्लाह के यहाँ सबसे बड़ा है ?
फरमाया
( अन् तज्अला लिल्लाहि निद्दन् वहुआ ख़लक़का )
यह कि तुम अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराओ , हालाँकि उसी ने तुम्हें पैदा किया है
मैंने कहा यह तो बहुत बड़ा गुनाह है
मैंने अर्ज़ किया फिर कौन सा ?
फरमाया
यह कि तुम अपने बच्चे को इस ख़तरे की वजह से क़त्ल कर दो कि वह तुम्हारे साथ खाएगा
मैंने अर्ज़ किया फिर कौन सा ?
फरमाया यह कि तुम अपने पड़ोसी की बीवी से ज़िना करो ।
सही बुखारी , किताबुत्तौहीद हदीस नम्बर 7520
राजेह-सही बुखारी 4477
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों की तअज़ीम के लिए क़याम करना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 11 ) अनस रज़ियल्लाहो ताला अन्ह कहते हैं कि कोई शख्स इन्हें ( सहाबा को )रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से ज़्यादह महबूब न था
कहते हैं वह लोग आपको देख कर खड़े न होते थे
इसलिए कि वह लोग जानते थे कि आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम इसे नापसन्द करते है ।
जामेअ तिर्मिज़ी , अब्वाबुल अदब, हदीस नम्बर 2754
तखरीज -सही
➖➖➖➖➖➖
*इबादत के तौर पर या एहतरामन किसी भी मखलूक़ को सज्दह करना जायज़ नहीं है*
➖➖➖➖➖➖
( 12 ) हज़रते अब्दुल्लाह बिन अबी औफा रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है उन्होंने फरमाया जब हज़रते मुआज़ रज़ियल्लाहो ताला अन्ह शाम से आये तो उन्होंने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को सज्दह किया आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
मुआज़ यह क्या ?
उन्होंने कहा मैं शाम गया तो मैंने वहाँ के लोगों को देखा कि वह अपने पादरियों और सरदारों को सज्दह करते हैं,
मुझे अपने दिल में यह बात अच्छी लगी कि हम लोग आपके साथ यह तरीक़ह इख्तेयार करें तो
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( फला तफ्अलू )
तुम न करो
अगर मैं किसी को अल्लाह के सिवा किसी के लिए सज्दह करने का हुक्म देता तो औरत को हुक्म देता कि अपने ख़ाविन्द को सज्दह किया करे
क़सम है उस ज़ात की जिसके हाथ में मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की जान है
औरत अपने रब का हक़ अदा नहीं कर सकती , जब तक अपने ख़ाविन्द का हक़ अदा नहीं करती
अगर वह ऊँट के कजावे पर बैठी हुई हो और ख़ाविन्द उससे ख़वाहिश का इज़्हार करे तो उसे इन्कार नहीं करना चाहिए ।
सुनन इब्ने माजह, अब्वाबुन्निकाह, हदीस नम्बर 1853
तखरीज - इस्नादह हसन
सही इब्ने हिब्बान ( मवारिद ) , हदीस नम्बर 1290
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों पर उर्स और मेले करना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 13 ) हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से मरवी है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( ला तज्अलु बुयूतकुम क़ुबूरा वला तज्अलु क़ब्रि ईदा वसल्लु अलय्या फइन्ना सलातकुम तब्लुगुनि हैसु कुन्तुम )
अपने घरों को क़ब्रिस्तान मत बनाओ
और न मेरी क़ब्र को ईद बनाओ
और मुझ पर दुरूद पढ़ो तुम जहाँ कहीं भी होगे तुम्हारा दुरूद मुझको पहुँच जाएगा ।
सुनन अबूदाऊद, किताबुल मनासिक, हदीस नम्बर 2042
तखरीज -इस्नादह हसन
मुस्नद अहमद, जि ल्द नम्बर 4,हदीस नम्बर 8790
➖➖➖➖➖➖
*ग़ैरुल्लाह की नज़र मानना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 14 ) हज़रते आइशा रज़ियल्लाहो ताला अन्हा से रिवायत है नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
जिसने इसकी नज़र मानी हो कि अल्लाह की इताअत करेगा तो उसे इताअत करनी चाहिए
लेकिन जिसने अल्लाह की मअसियत की नज़र मानी हो उसे नाफरमानी न करनी चाहिए ।
सही बुखारी , किताबुल ऐमान वन्नुज़ूर , हदीस नम्बर 6696
तखरीज -सुनन अबूदाऊद 3289
➖➖➖➖➖➖
*मुर्दों की खुशनोदी के लिए सफर करना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 15 ) हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया 3 मस्जिदों के अलावा किसी के लिए कजावे न बाँधे जाएँ,
एक मस्जिद ए हराम, दूसरी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की मस्जिद और तीसरी मसाजिद ए अक़्सा ।
सही बुखारी, किताबुत्तहज्जद, हदीस नम्बर 1189
तखरीज -सही मुस्लिम 3384
सुनन अबू दाऊद 2033
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों पर फातिहा ख्वानी करना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 16 ) हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( ला तज्अलु बुयूतकुम्मक़ाबिरा इन्नश्शैताना यन्फिरु मिनल्बैतिल्लज़ी तुक़्रऊ फीहि सूरतुल्बक़रति )
अपने घरों को क़ब्रिस्तान न बनाओ , शैतान उस घर से भागता है जिसमें सूरह बक़रह पढ़ी जाती है ।
सही मुस्लिम , किताब सलातिल्मुसाफिरीन व क़ज़रिहा , हदीस नम्बर 780 ( 1824 )
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों पर लिखना भी हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 17 ) हज़रते जाबिर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि
मना फरमाया रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने
क़ब्रों के पुख्ता बनाने से और उसके ऊपर लिखने से और उसके ऊपर मकान या गुम्बद बनाने से और उसके ऊपर चलने से ।
जामेअ तिर्मिज़ी, किताबुल जनायज़, हदीस नम्बर 1052
तखरीज -सही
➖➖➖➖➖➖
*नोट -क़ब्रों की पहचान के लिए , मय्यत की क़ब्र के सर की तरफ पत्थर रखा जा सकता है जैसा कि सुनन अबू दाऊद हदीस नम्बर 3206 मे है*
➖➖➖➖➖➖
*क्या क़ब्रों मे मद्फून हस्तियाँ लोगो की फरियाद सुन सकते है ?*
➖➖➖➖➖➖
( 18 ) वह रात को दिन मे और दिन को रात में दाखिल करता है और आफताब व माहताब को उसी ने काम मे लगा दिया है ,हर एक मीयाद मुअय्यन पर चल रहा है यही है अल्लाह तुम सबका पालने वाला उसी की सल्तनत है जिन्हें तुम उसके सिवा पुकार रहे हो , वह तो खजूर की गुठली के छिलके के भी मालिक नहीं है ( 13 )
अगर तुम उन्हें पुकारो तो वह तुम्हारी पुकार सुनते ही नहीं और अगर सुन भी ले तो फरियाद रसी नहीं करेंगे बल्कि क़यामत के दिन तुम्हारे इस शिर्क का साफ इनकार कर जाएंगे आपको कोई हक़ तआला जैसा खबरदार खबरें न देगा ( 14 )
सूरह फातिर सूरह नम्बर 35 आयत नम्बर 13-14
➖➖➖➖➖➖
( 19 ) और उससे बढ़कर गुमराह और कौन होगा ? जो अल्लाह के सिवा ऐसों को पुकारता है जो क़यामत तक उसकी दुआ क़ुबूल न कर सकें बल्कि उनके पुकारने से महज़ बेखबर हों ( 5 )
सूरह अल अहक़ाफ सूरह नम्बर 46 आयत नम्बर 5
➖➖➖➖➖➖
( 20 ) और ज़िन्दे और मुर्दे बराबर नहीं हो सकते अल्लाह तआला जिसको चाहता है सुना देता है और आप उन लोगों को नहीं सुना सकते जो क़ब्रों में हैं ( 22 )
सूरह फातिर सूरह नम्बर 35 आयत नम्बर 22
➖➖➖➖➖➖
( 21 ) बेशक आप मुर्दों को नहीं सुना सकते और न बहरों को आवाज़ सुना सकते हैं जबकी वह पीठ फेरकर मुड़ गये हों ( 52 )
सूरह रूम सूरह नम्बर 30 आयत नम्बर 52
➖➖➖➖➖➖
नोट -इसी तरह की आयत सूरह अन नम्ल सूरह नम्बर 27 आयत नम्बर 80 भी है और यह आम आयत है कि मुर्दे नही सुनते
अलबत्ता इससे वह सूरतें मुतसन्नह होंगी जहाँ समाअत की सराहत किसी नस से साबित होगी जैसे -
( 1 ) सही बुखारी हदीस नम्बर 338 मे है कि लोग मुर्दे को जब दफनाकर जब वापस जातें हैं तो वह मुर्दा दफन करके जाने वालों के जूतों की आहट सुनता है
( 2 ) जंगे बद्र के काफिर मुर्दों से नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम का मोअजज़ानह खिताब- सही बुखारी हदीस नम्बर 1307
यह खास हुक्म मे है इस स्थिति के अलावा मुर्दे नहीं सुन सकते
➖➖➖➖➖➖
*नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम दुरूद को खुद नहीं सुनते बल्कि फरिश्ते दुरूद पहुँचाते हैं*
➖➖➖➖➖➖
( 22 ) अब्दुल्लाह इब्ने मसूद रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है ,
नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
अल्लाह के फरिश्ते ज़मीन में सैर करते हैं वह मुझे मेरी उम्मत का सलाम पहुँचाते हैं ।
फज़लुस सलात अलन् नबिय्यि सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम लिल इमाम इस्माईल बिन इस्हाक़ अल क़ाज़ी ( 199-282 हिजरी ), हदीस नम्बर 21
तखरीज -इस्नादह सही
➖➖➖➖➖➖
*क्या क़ब्रों मे मद्फून हस्तियाँ सीढ़ी या वसीलह बनकर , हाजत रवा या मुश्किल कुशा बन सकते हैं ?*
➖➖➖➖➖➖
( 23 ) यह मुशरिकीन अल्लाह के सिवा उनकी इबादत करते हैं जो उन्हें न नफा पहुँचा सके न नुक़सान और कहते हैं कि यह अल्लाह के पास हमारे सिफारशी हैं ( 18 )
सूरह युनुस आयत नम्बर 18
➖➖➖➖➖➖
( 24 ) क्या मैं उसे छोड़कर ऐसो को माबूद बनाऊँ कि अगर रहमान मुझे कोई नुक़सान पहुँचाना चाहे तो उनकी सिफारिश मुझे कुछ भी नफअ न पहुँचा सके और न वह मुझे बचा सकें ( 23 )
सूरह यासीन सूरह नम्बर 36 आयत नम्बर 23
➖➖➖➖➖➖
*कुछ लोगों को यह गलत फहमी है कि ईमान वाले शिर्क नहीं कर सकते और क़ब्रों मे मदफून हस्तियों की इबादत करते है ,जबकि क़ुर्आन मे हे-*
➖➖➖➖➖➖
( 25 ) ( वमा युअमिनु अक्सरुहुम बिल्लाहि इल्ला वहुम् मुशरिकून् ( 106 )
इनमें से अक्सर लोग बावजूद अल्लाह पर ईमान रखने के भी मुशरिक हैं ।
सूरह यूसुफ सूरह नम्बर 12 आयत नम्बर 106
➖➖➖➖➖➖
*क्या कोई शहीद, औलिया या क़ब्रों मे मदफून लोग इसानों के ऊपर सवारी ले सकते हैं ?*
➖➖➖➖➖➖
*शहीद अपने रब के पास जन्नत मे ज़िन्दा हैं , वहाँ से छुटकारा पाकर यह रूहें दुनियाँ मे नही आ सकतीं*
➖➖➖➖➖➖
( 26 ) जो लोग अल्लाह की राह में शहीद किये गये उनको हरगिज़ मुर्दा न समझें बल्कि वह ज़िन्दा है अपने रब के पास रोज़ियाँ दिये जाते हैं ( 169 )
सूरह आल इमरान सूरह नम्बर 3 आयत नम्बर 169
➖➖➖➖➖➖
*ऊपर की आयत की सही तफसीर जो नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने बतलायी है , जिस आयत को पढ़कर बअज़ लोग, लोगों को क़ब्र परस्ती के दलदल मे ढ॔केल देते हैं*
➖➖➖➖➖➖
( 27 ) हज़रते इब्ने मसूद रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने फरमाया हमने भी इसी बारे में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से दरयाफ्त किया था आपने फरमाया
इनकी रूहें सब्ज़ परिन्दों के अन्दर रहती हैं उनके लिए अर्श ए इलाही के साथ क़न्दीलें लटकी हुई हैं
वह रूहें जन्नत मे जहाँ चाहें खाती पीती हैं, फिर उन क़न्दीलों की तरफ लौट आती है
उनके रब ने ऊपर से उनकी तरफ झाँककर देखा और फरमाया
क्या तुम्हें किसी चीज़ की ख्वाहिश है ?
उन्होंने जवाब दिया हम क्या ख्वाहिश करें
हम जन्नत मे जहाँ चाहते हैं घूमते और खाते पीते हैं
अल्लाह ने 3 बार ऐसा किया
जब उन्होंने देखा कि उनको छोड़ा नहीं जायेगा उनसे सवाल होता रहेगा तो उन्होंने कहा
ऐ हमारे रब हम यह चाहते है
कि हमारी रूहों को हमारे जिस्मों में लौटा दिया जाय
ताकि हम दुबारा तेरी राह में शहीद किये जायें
जब अल्लाह तआला यह देखेगा कि उनको कोई हाजत नहीं है तो उनको छोड़ दिया जायेगा ।
सही मुस्लिम, किताबुल इमारह, हदीस नम्बर 1887 ( 4885 )
➖➖➖➖➖➖
*आलम ए बर्ज़ख से निकल कर कोई इस दुनिया मे नही आ सकता , तो आसेब ज़दा पर सवारी कहाँ से लेगा*
➖➖➖➖➖➖
( 28 ) यहाँ तक कि जब उनमें से किसी को मौत आने लगती है तो कहता है ऐ मेरे परवरदिगार ! मुझे वापस लौटा दे ( 99 )
कि अपनी छोड़ी हुई दुनिया मे जाकर नेक आमाल कर लूँ , हरगिज़ ऐसा नहीं होगा , यह तो सिर्फ एक क़ौल है जिसका यह क़ायल है
( वमिव्वराइहिम बर्ज़खुन इला यौमि युब्अषून )
उनके पस ए पुश्त तो एक हिजाब है , उनके दुबारा जी उठने के दिन तक ( 100 )
सूरह अल् मुअमिनून सूरह नम्बर 23 आयत नम्बर 99-100
➖➖➖➖➖➖
नोट -क़ब्रों मे मद्फून लोग तो सवारी नहीं ले सकते अल्बत्तह , जिन्नात और शैतान सवारी लेते है , और कहते है कि मैं फलाँ बाबा हूँ -
➖➖➖➖➖➖
*जिन्न व शैतान के सवारी लेने की दलीलें,*
➖➖➖➖➖➖
सही बुखारी 2038,5652
सही मुस्लिम 2995 ( 7491 )
सुनन इब्ने माजह 3548
➖➖➖➖➖➖
*काहिनों से ग़ैब की खबरें पूछने वालों की 40 दिन तक नमाज़ क़ुबूल नहीं होती*
➖➖➖➖➖➖
( 29 ) सफियह रज़ियल्लाहो ताला अन्हा ने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की एक अहलियह से और उन्होंने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से रिवायत की, कि आपने फरमाया
जो शख्स किसी ग़ैब की खबरें सुनाने वाले के पास आये और उससे किसी चीज़ के बारे में पूछे तो 40 रातों तक उस शख्स की नमाज़ क़ुबूल नहीं होती ।
सही मुस्लिम किताबुल सलाम, बाब तहरीम अल कहानत व इत्यान अल् कहान् , हदीस नम्बर 2230 ( 5821 )
➖➖➖➖➖➖
*कभी -कभी जादूगरों के 100 झूठो मे से एक बात सच कैसे निकल आती है ?*
➖➖➖➖➖➖
( 30 ) उम्मुल मोमिनीन हज़रते आइशा रज़ियल्लाहो ताला अन्हा से रिवायत है मैंने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ! बअज़ बातें हमसे नुजूमी कहते हैं और वह सच निकलती हैं
आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया यह सच बात जिन उसको उचक लेता है और अपने दोस्तों के कान में डाल देता है और 100 झूठ उसमें बढ़ा देता है ।
सही मुस्लिम किताबुल सलाम , हदीस नम्बर ( 2228 ) 5816
तखरीज -सही बुखारी 5762
➖➖➖➖➖➖
*दरगाह और आस्ताने फोह्हाशी का अड्डा हैं*
➖➖➖➖➖➖
( 31 ) जो लोग मुसलमानों में बेहयाई फैलाने के आरज़ूमन्द रहते हैं उनके लिए दुनियाँ और आखिरत में दर्दनाक अज़ाब है, अल्लाह सब कुछ जानता है और तुम कुछ भी नहीं जानते ( 19 )
सूरह अल नूर सूरह नम्बर 24 आयत नम्बर 19
➖➖➖➖➖➖
*दरगाहों -आस्तानो पर बेपार्दगी होती है*
➖➖➖➖➖➖
( 32 ) इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने बयान किया कि अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह की हदीस से ज़्यादह सग़ीरह गुनाहों से मुशाबह मैंने और कोई चीज़ नहीं देखी ••••••अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से नक़्ल किया है
अल्लाह ताला ने इँसानों के मामले मे ज़िना में से उसका हिस्सा लिख दिया है, जिससे वह लामुहालह दो-चार होगा
पस आँख का ज़िना देखना है
ज़ुबान का ज़िना बोलना है
दिल का ज़िना यह है कि वह ख्वाहिश और आरज़ू करता है
फिर शर्मगाह इस ख्वाहिश को सच्चा करती हैं या झुठला देती है ।
सही बुखारी, किताबुल इस्तीज़ान , हदीस नम्बर 6243
तखरीज -इतराफ फी , सही बुखारी 6612
सही मुस्लिम 6753
सुनन अबू दाऊद 2152
➖➖➖➖➖➖
( 33 ) हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से रिवायत की कि आपने फरमाया
इब्ने आदम के मुताल्लुक़ ज़िना में से उसका हिस्सा लिख दिया गया है वह लामुहालह उसको हासिल करने वाला है
पस दोनों आँखें उनका ज़िना देखना है
और दोनों कान उनका ज़िना सुनना है
और ज़ुबान उसका ज़िना बात करना है
और हाथ उसका ज़िना पकड़ना है
और पाँव उसका ज़िना चलकर जाना है
और दिल तमन्ना रखता है और ख्वाहिश करता है
और शर्मगाह उन तमाम बातों की तस्दीक़ करती है या उसकी तकज़ीब करती है ।
सही मुस्लिम, किताबुल क़द्र , हदीस नम्बर 2657 ( 6754 )
➖➖➖➖➖➖
*दरगाहों ,आस्तानो पर ग़जेड़ियों , चर्सियों की भीड़ रहती है जबकि हर नशा आवर चीज़ हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 34 ) हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( कुल्लु मुस्किरिन खमरुन व कुल्लु खमरिन हराम )
हर नशाआवर चीज़ शराब है और हर शराब हराम है ।
सुनन इब्ने माजह हदीस नम्बर 3390
तखरीज -इस्नादह हसन
जामेअ तिर्मिज़ी 1864
➖➖➖➖➖➖
( 35 ) हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( कुल्लु मुस्किरिन हरामुन वमा अस्करा कसीरुहू , फक़लीलुहू हराम )
हर नशाआवर चीज़ हराम है, और जिस चीज़ की ज़्यादा मिक़दार से नशा आए उसकी थोड़ी मिक़दार भी हराम है ।
सुनन इब्ने माजह हदीस नम्बर 3392
तखरीज -सही
➖➖➖➖➖➖
*क़व्वालियों का रद्द*
➖➖➖➖➖➖
*गाने बजाने को नाम बदलकर क़व्वालियों की शक़्ल मे सुना जाता है, यह अज़ाब नाज़िल होने का ज़रियह है*
➖➖➖➖➖➖
( 36 ) अबू आमिर या अबू मालिक अशअरी रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने बयान किया अल्लाह की क़सम ! उन्होंने झूठ नहीं बयान किया कि उन्होंने नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से सुना आँहज़रत सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
मेरी उम्मत में ऐसे बुरे लोग पैदा हों जाएँगे
जो ज़िनाकारी , रेशम का पहनना, शराब पीना और गाने बजाने को हलाल बना लेंगे
और कुछ मुतकब्बिर क़िस्म के लोग पहाड़ की चोटी पर चले जाएंगे
चरवाहे उनके मवेशी सुबह व शाम लाएँगें और ले जाएंगे
उनके पास एक फक़ीर आदमी अपनी ज़रूरत लेकर जाएगा तो वह टालने के लिए उससे कहेंगे कि कल आना लेकिन अल्लाह ताला रात ही को उनको हलाक कर देगा , पहाड़ को गिरा देगा
और उनमें से बहुत सों को क़यामत तक के लिए बन्दर और सुअर की सूरतों में मस्ख कर देगा ।
सही बुखारी, किताबुल अश्रबह, हदीस नम्बर 5590
तखरीज -सुनन अबू दाऊद 4039
➖➖➖➖➖➖
*ढोल ( अल कूबह ) हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 37 ) हज़रते इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि वफद अब्दुल क़ैस के लोगों ने कहा, ऐ अल्लाह के रसूल ! हम किस चीज़ में पियें ? आपने फरमाया
कद्दू के बरतन , तारकोल के बरतन और लकड़ी के बरतन में मत पियो
अपने मश्कीज़ो में नुबैज़ बनाया करो
उन्होंने कहा, ऐ अल्लाह के रसूल ! अगर मश्कीज़ो मे होते हुए भी उसमें शिद्दत आ जाए तो ? आपने फरमाया उसमें मज़ीद पानी डाल लिया करो
उन्होंने कहा ऐ अल्लाह के रसूल ! तो आपने तीसरी या चौथी बार फरमाया उसे बहा डालो फिर फरमाया
अल्लाह ताला ने मुझपर हराम फरमाया है या कहा •••••हराम की गयी हैं ••••••शराब , जुआ और कूबा और फरमाया हर नशा देने वाली चीज़ हराम है ।
सुफियान सौरी रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं मैंने अली बिन बज़ीमह से कूबह की वज़ाहत पूछी तो उन्होंने कहा इससे मुराद ढ़ोल है ।
सुनन अबू दाऊद हदीस नम्बर 3696
तखरीज -इस्नादह सही
➖➖➖➖➖➖
*क़व्वाली सुनना लहु व लोअब का काम है*
➖➖➖➖➖➖
*लहुवल हदीस की तफसीर*
➖➖➖➖➖➖
( 38 ) सैय्यिदिना इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने
( वमिनन्नासि म॔य्यश्तरी लहुवल हदीस )
की तफसीर करते हुए फरमाया कि इससे मुराद गाना बजाना और इससे मिलती -जुलती चीज़ें हैं ।
आदाबुल मुफ्रिद लिल इमाम बुखारी हदीस नम्बर 786
तखरीज -सही
➖➖➖➖➖➖
*क़व्वालियों में शिर्किया अश्आर पढ़े जाने की मज़म्मत*
➖➖➖➖➖➖
*क़व्वाल नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की शान मे या दूसरे औलिया की शान में नाहक़ ग़ुलू करता है*
➖➖➖➖➖➖
( 39 ) हज़रते इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने हज़रते उमर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह को मिम्बर पर यह कहते हुए सुना था कि मैंने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से सुना आप ने फरमाया
( ला तुत्रूनी कमा अत्रतिन्नसारब्ना मर्यम , फइन्नमा अना अब्दुहू , वलाकिन् क़ूलू : अब्दुल्लाहि वरसूलुह )
मुझे मेरे मर्तबे से ज़्यादह न बढ़ाओ , जैसे ईसा बिन मरयम अलैहिस्सलाम को नसारा ने उनके मर्तबे से ज़्यादह बढ़ा दिया है
मैं तो सिर्फ अल्लाह का बन्दह हूँ
इसलिए यही कहा करो कि
मैं अल्लाह का बन्दह और उसका रसूल हूँ ।
सही बुखारी, किताबु अहादीसिल् अम्बिया, हदीस नम्बर 3445
➖➖➖➖➖➖
*इल्मे ग़ैब पर ग़ुलू करने पर नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम का छोटी बच्चियों को तम्बीह करना*
➖➖➖➖➖➖
( 40 ) रुब्बै बिन्ते मऊज़ रज़ियल्लाहो ताला अन्हा ने बयान किया कि जिस रात मेरी शादी हुई थी नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम उसकी सुबह को मेरे यहाँ तशरीफ लाए और मेरे बिस्तर पर बैठे जैसे अब तुम यहाँ मेरे पास बैठे हुए हो
चन्द बच्चियाँ दफ बजा रहीं थी और वह अश्आर पढ़ रहीं थी जिनमें उनके उन खानदान वालों का ज़िक्र था जो बद्र की लड़ाई मे शहीद हो गये थे
उन्हीं मे एक लड़की ने यह मिसरअ भी पढ़ा कि
हममें नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम हैं जो कल होने वाली बात को जानते हैं
नबी अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
यह न पढ़ो बल्कि जो पहले पढ़ रही थीं वही पढ़ो ।
सही बुखारी, किताबुल मग़ाज़ी , हदीस नम्बर 4001
तखरीज -सुनन अबूदाऊद 4922
सुनन इब्ने माजह 1897
➖➖➖➖➖➖
*जिसने तावीज़ लटकाया उसने शिर्क किया*
➖➖➖➖➖➖
( 41 ) सैय्यिदिना उक़्बह बिन आमिर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि
एक जमात नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के पास आई आपने 9 अफराद से बैअत ले ली और एक से न ली
उन्होंने कहा ऐ अल्लाह के रसूल ! आपने 9 अफराद से बैअत ले ली और एक को तर्क कर दिया ?
आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया इसने तावीज़ लटकाया हुआ है
उसने अपना हाथ दाखिल किया और तावीज़ काट दिया
फिर आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने उनसे बैअत ले ली और फरमाया
( मन् अल्लक़ा तमीमतन फक़द् अश्रक )
जिसने तावीज़ लटकाया उसने शिर्क किया ।
मुस्नद अहमद, उर्दू तर्जुमा, जिल्द नम्बर 7 ( हफ्तुम ), सफा नम्बर 211 , हदीस नम्बर 17558
तखरीज -क़ाला शुऐब अस्नादह क़वी
अहादीसुल सहीहह, उर्दू तर्जुमा, जिल्द नम्बर 4 , हदीस नम्बर 3122
➖➖➖➖➖➖
*दरगाहों के सज्जादा नशीनों का लिबास ज़अफरानी रंग का होता है जो कि हराम है*
➖➖➖➖➖➖
हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने बयान किया कि नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने मनअ किया था कि कोई महरम वर्स या ज़अफरान से रँगा हुआ कपड़ा पहने ।
सही बुखारी , किताबुल लिबास, हदीस नम्बर 5847
राजेह-सही बुखारी हदीस नम्बर 134
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
*बिस्मिललाहिर रहमानिर रहीम*
➖➖➖➖➖➖
*दरगाह और आस्तानो की हक़ीक़त*
➖➖➖➖➖➖
*जिसने किसी क़ौम की मुशाबहत इख्तेयार की तो वह उन्हीं में से होगा*
*( दरगाह पर किये जाने वाले कामों मे और ग़ैर क़ौमों के इबादत खानों मे किए जाने वाले कामों मे मुशाबहत पायी जाती है )*
➖➖➖➖➖➖
( 1 ) हज़रते इब्ने उमर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( मन् तशब्बहा बिक़ौमिन फहुआ मिन्हुम )
जिसने किसी क़ौम से मुशाबहत इख्तेयार की तो वह उन्हीं मे से हुआ ।
सुनन अबू दाऊद , बाब फी लुब्सिश शुहरति , किताबुल लिबास, हदीस नम्बर 4031
तखरीज -हसन
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों को पक्की बनाना, क़ब्रों पर मुजावर बन कर बैठना , क़ब्रों के ऊपर इमारत बनाना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 2 ) हज़रते जाबिर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है उन्होंने कहा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने मना फरमाया कि क़ब्र पर चूना लगाया जाय और उस पर बैठा जाय और उस पर इमारत बनाई जाय ।
सही मुस्लिम किताबुल जनायज़, हदीस नम्बर 970 ( 2244 )
तखरीज -सुनन निसाई 2026
सुनन इब्ने माजह 1563
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों को सज्दह गाह या दरगाह बनाने वालों पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने लानत फरमाई है*
➖➖➖➖➖➖
( 3 ) हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( कातलल्लाहुल् यहूदत्तख़ज़ू क़ुबूरा अम्बियाइहिम मसाजिद )
यहूदियों पर अल्लाह की लानत हो उन्होंने अपने अम्बिया की क़ब्रों को मसाजिद बना लिया ।
सही बुखारी , किताबुस्सलात, हदीस नम्बर 437
तखरीज -सही मुस्लिम 1185
सुनन अबू दाऊद 3227
➖➖➖➖➖➖
*बअज़ लोग कहते है कि क़ब्रों को ज़मीन के बराबर करने वाली हदीस मुशरिकीन के बारे में है , उसका जवाब*
➖➖➖➖➖➖
( 4 ) षुमामह बिन शुफ्फै ने बयान किया कहा हम सर ज़मीन ए रूम के जज़ीरह रोदस मे फज़ालह बिन उबैद रज़ियल्लाहो ताला अन्ह के साथ थे कि
हमारा एक दोस्त वफात पा गया , हज़रते फज़ालह बिन उबैद रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने उनकी क़ब्र के बारे में हुक्म दिया तो उसको बराबर कर दिया गया
फिर उन्होंने कहा मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से सुना है कि
आप इनको बराबर करने का हुक्म देते थे ।
सही मुस्लिम किताबुल जनायज़, हदीस नम्बर 968 ( 2242 )
तखरीज -सुनन अबूदाऊद 3219
सुनन निसाई 2029
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों को बुत बनाना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 5 ) अता बिन यसार से रिवायत है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( अल्लाहुम्मा ला तज्अल क़बरी वसनन युअबदुश्तद्दा )
ऐ मेरे परवरदिगार मेरी क़ब्र को बुत मत बनाना कि लोग उसको पूजें
( ग़ज़बल्लाहि अला क़ौमित्तख़ज़ु क़ुबूरा अम्बिया इहिम मसाजिद )
बहुत बड़ा ग़ज़ब अल्लाह का उन लोगों पर है जिन्होंने अपने पैगम्बरों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया ।
मोता इमाम मालिक , किताब क़स्र अस सलात फिस्सफर , हदीस नम्बर 412 ( आन लाइन बुक )
हदीस नम्बर 410( तखरीज शुदा )
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों वाले के नियाज़ का खाना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 6 ) तुम पर मुरदार और खून और सुअर का गोश्त और हर वह चीज़ जिस पर अल्लाह के सिवा दोसरे का नाम पुकारा गया हो हराम है फिर जो मजबूर हो जाय और वह हद से बढ़ने वाला और ज़्यादती करने वाला न हो उस पर उनके खाने में कोई गुनाह नहीं , अल्लाह तआला बख्शिश करने वाला मेहरबान है ( 173 )
सूरह अल बक़रह सूरह नम्बर 2 आयत नम्बर 173
➖➖➖➖➖➖
*मक्खी का चढ़ावा देने की वजह से जहन्नुम मे जाना*
➖➖➖➖➖➖
( 7 ) सैय्यिदिना सलमान रज़ियल्लाहो ताला अन्ह फरमाते हैं एक शख्स मक्खी की वजह से जन्नत मे जा पहुँचा और एक जहन्नुम मे चला गया, लोगों ने अर्ज़ किया यह कैसे ?
तो फरमाया कि 2 शख्स चले चलते -चलते एक बुत परस्त क़ौम के पास से गुज़रे जो किसी मुसाफिर को उनके बुत पर कुछ भेंट चढ़ाए बगैर नहीं गुज़रने देते थे चुनाँचे उन्होंने एक को कहा हमारे बुत के यहाँ कुछ चढ़ावा चढ़ाओ , उसने कहा कि मेरे पास कोई चीज़ नहीं, उन्होंने कहा तुम्हें यह ज़रूर करना होगा , अगर चे एक मक्खी ही क्यों न हो पस उसने मक्खी क़ुर्बान कर दी और उसकी जान बच गयी लेकिन वह जहन्नुम मे दाखिल हुआ
दूसरे को भी ऐसा ही कहा तो उसने जवाब दिया कि मैं ग़ैरुल्लाह के नाम पर कोई भी चीज़ चढ़ावा नहीं चढ़ा सकता उसको उन्होंने शहीद कर दिया , तो वह जन्नत मे जा पहुँचा ।
किताबुज़ज़ोहद लिल इमाम अहमद, सफा 33 , रक़म 84
हिल्यतुल् औलिया, 262/1 , रक़म 646
तखरीज -मौक़ूफ सही
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों पर जानवर ज़िबह करना या मुर्गा ज़िबह करना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 8 ) हज़रते अनस रज़ियल्लाहो ताला अन्ह बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( ला अक़्रा फिल्इस्लामि )
इस्लाम मे अक़्र नहीं है
इमाम अब्दुर्रज़्ज़ाक़ रहमतुल्लाह अलैह ने बयान किया कि
लोगों का मअमूल था कि वह क़ब्र के पास गाय व बकरी वग़ैरह ज़िबह करते थे ।
सुनन अबू दाऊद , किताबुल जनायज़, हदीस नम्बर 3222
तखरीज -इस्नादह सही
सही इब्ने हिब्बान हदीस नम्बर 738
➖➖➖➖➖➖
*दुआ ही अस्ल इबादत इसलिए क़ब्रों मे मद्फून हस्तियों से दुआ करना शिर्क है*
➖➖➖➖➖➖
( 9 ) हज़रते नोमान बिन बशीर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( अद्दुआओ हियल्इबादतु )
दुआ इबादत ही है
तुम्हारे रब ने फरमाया
( अद्ऊनी अस्तजिब् लकुम -सूरह ग़ाफिर आयत नम्बर 60 )
मुझे पुकारो मैं क़ुबूल करूँगा ।
सुनन अबू दाऊद, किताब अल वित्र, हदीस नम्बर 1479
तखरीज -इस्नादह सही
सुनन इब्ने माजह 3828
जामेअ तिर्मिज़ी 2969
➖➖➖➖➖➖
*सबसे बड़ा गुनाह शिर्क करना है*
➖➖➖➖➖➖
( 10 ) हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसूद रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने बयान किया कि मैंने नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से पूछा कि कौन सा गुनाह अल्लाह के यहाँ सबसे बड़ा है ?
फरमाया
( अन् तज्अला लिल्लाहि निद्दन् वहुआ ख़लक़का )
यह कि तुम अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराओ , हालाँकि उसी ने तुम्हें पैदा किया है
मैंने कहा यह तो बहुत बड़ा गुनाह है
मैंने अर्ज़ किया फिर कौन सा ?
फरमाया
यह कि तुम अपने बच्चे को इस ख़तरे की वजह से क़त्ल कर दो कि वह तुम्हारे साथ खाएगा
मैंने अर्ज़ किया फिर कौन सा ?
फरमाया यह कि तुम अपने पड़ोसी की बीवी से ज़िना करो ।
सही बुखारी , किताबुत्तौहीद हदीस नम्बर 7520
राजेह-सही बुखारी 4477
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों की तअज़ीम के लिए क़याम करना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 11 ) अनस रज़ियल्लाहो ताला अन्ह कहते हैं कि कोई शख्स इन्हें ( सहाबा को )रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से ज़्यादह महबूब न था
कहते हैं वह लोग आपको देख कर खड़े न होते थे
इसलिए कि वह लोग जानते थे कि आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम इसे नापसन्द करते है ।
जामेअ तिर्मिज़ी , अब्वाबुल अदब, हदीस नम्बर 2754
तखरीज -सही
➖➖➖➖➖➖
*इबादत के तौर पर या एहतरामन किसी भी मखलूक़ को सज्दह करना जायज़ नहीं है*
➖➖➖➖➖➖
( 12 ) हज़रते अब्दुल्लाह बिन अबी औफा रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है उन्होंने फरमाया जब हज़रते मुआज़ रज़ियल्लाहो ताला अन्ह शाम से आये तो उन्होंने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को सज्दह किया आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
मुआज़ यह क्या ?
उन्होंने कहा मैं शाम गया तो मैंने वहाँ के लोगों को देखा कि वह अपने पादरियों और सरदारों को सज्दह करते हैं,
मुझे अपने दिल में यह बात अच्छी लगी कि हम लोग आपके साथ यह तरीक़ह इख्तेयार करें तो
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( फला तफ्अलू )
तुम न करो
अगर मैं किसी को अल्लाह के सिवा किसी के लिए सज्दह करने का हुक्म देता तो औरत को हुक्म देता कि अपने ख़ाविन्द को सज्दह किया करे
क़सम है उस ज़ात की जिसके हाथ में मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की जान है
औरत अपने रब का हक़ अदा नहीं कर सकती , जब तक अपने ख़ाविन्द का हक़ अदा नहीं करती
अगर वह ऊँट के कजावे पर बैठी हुई हो और ख़ाविन्द उससे ख़वाहिश का इज़्हार करे तो उसे इन्कार नहीं करना चाहिए ।
सुनन इब्ने माजह, अब्वाबुन्निकाह, हदीस नम्बर 1853
तखरीज - इस्नादह हसन
सही इब्ने हिब्बान ( मवारिद ) , हदीस नम्बर 1290
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों पर उर्स और मेले करना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 13 ) हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से मरवी है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( ला तज्अलु बुयूतकुम क़ुबूरा वला तज्अलु क़ब्रि ईदा वसल्लु अलय्या फइन्ना सलातकुम तब्लुगुनि हैसु कुन्तुम )
अपने घरों को क़ब्रिस्तान मत बनाओ
और न मेरी क़ब्र को ईद बनाओ
और मुझ पर दुरूद पढ़ो तुम जहाँ कहीं भी होगे तुम्हारा दुरूद मुझको पहुँच जाएगा ।
सुनन अबूदाऊद, किताबुल मनासिक, हदीस नम्बर 2042
तखरीज -इस्नादह हसन
मुस्नद अहमद, जि ल्द नम्बर 4,हदीस नम्बर 8790
➖➖➖➖➖➖
*ग़ैरुल्लाह की नज़र मानना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 14 ) हज़रते आइशा रज़ियल्लाहो ताला अन्हा से रिवायत है नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
जिसने इसकी नज़र मानी हो कि अल्लाह की इताअत करेगा तो उसे इताअत करनी चाहिए
लेकिन जिसने अल्लाह की मअसियत की नज़र मानी हो उसे नाफरमानी न करनी चाहिए ।
सही बुखारी , किताबुल ऐमान वन्नुज़ूर , हदीस नम्बर 6696
तखरीज -सुनन अबूदाऊद 3289
➖➖➖➖➖➖
*मुर्दों की खुशनोदी के लिए सफर करना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 15 ) हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया 3 मस्जिदों के अलावा किसी के लिए कजावे न बाँधे जाएँ,
एक मस्जिद ए हराम, दूसरी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की मस्जिद और तीसरी मसाजिद ए अक़्सा ।
सही बुखारी, किताबुत्तहज्जद, हदीस नम्बर 1189
तखरीज -सही मुस्लिम 3384
सुनन अबू दाऊद 2033
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों पर फातिहा ख्वानी करना हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 16 ) हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( ला तज्अलु बुयूतकुम्मक़ाबिरा इन्नश्शैताना यन्फिरु मिनल्बैतिल्लज़ी तुक़्रऊ फीहि सूरतुल्बक़रति )
अपने घरों को क़ब्रिस्तान न बनाओ , शैतान उस घर से भागता है जिसमें सूरह बक़रह पढ़ी जाती है ।
सही मुस्लिम , किताब सलातिल्मुसाफिरीन व क़ज़रिहा , हदीस नम्बर 780 ( 1824 )
➖➖➖➖➖➖
*क़ब्रों पर लिखना भी हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 17 ) हज़रते जाबिर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि
मना फरमाया रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने
क़ब्रों के पुख्ता बनाने से और उसके ऊपर लिखने से और उसके ऊपर मकान या गुम्बद बनाने से और उसके ऊपर चलने से ।
जामेअ तिर्मिज़ी, किताबुल जनायज़, हदीस नम्बर 1052
तखरीज -सही
➖➖➖➖➖➖
*नोट -क़ब्रों की पहचान के लिए , मय्यत की क़ब्र के सर की तरफ पत्थर रखा जा सकता है जैसा कि सुनन अबू दाऊद हदीस नम्बर 3206 मे है*
➖➖➖➖➖➖
*क्या क़ब्रों मे मद्फून हस्तियाँ लोगो की फरियाद सुन सकते है ?*
➖➖➖➖➖➖
( 18 ) वह रात को दिन मे और दिन को रात में दाखिल करता है और आफताब व माहताब को उसी ने काम मे लगा दिया है ,हर एक मीयाद मुअय्यन पर चल रहा है यही है अल्लाह तुम सबका पालने वाला उसी की सल्तनत है जिन्हें तुम उसके सिवा पुकार रहे हो , वह तो खजूर की गुठली के छिलके के भी मालिक नहीं है ( 13 )
अगर तुम उन्हें पुकारो तो वह तुम्हारी पुकार सुनते ही नहीं और अगर सुन भी ले तो फरियाद रसी नहीं करेंगे बल्कि क़यामत के दिन तुम्हारे इस शिर्क का साफ इनकार कर जाएंगे आपको कोई हक़ तआला जैसा खबरदार खबरें न देगा ( 14 )
सूरह फातिर सूरह नम्बर 35 आयत नम्बर 13-14
➖➖➖➖➖➖
( 19 ) और उससे बढ़कर गुमराह और कौन होगा ? जो अल्लाह के सिवा ऐसों को पुकारता है जो क़यामत तक उसकी दुआ क़ुबूल न कर सकें बल्कि उनके पुकारने से महज़ बेखबर हों ( 5 )
सूरह अल अहक़ाफ सूरह नम्बर 46 आयत नम्बर 5
➖➖➖➖➖➖
( 20 ) और ज़िन्दे और मुर्दे बराबर नहीं हो सकते अल्लाह तआला जिसको चाहता है सुना देता है और आप उन लोगों को नहीं सुना सकते जो क़ब्रों में हैं ( 22 )
सूरह फातिर सूरह नम्बर 35 आयत नम्बर 22
➖➖➖➖➖➖
( 21 ) बेशक आप मुर्दों को नहीं सुना सकते और न बहरों को आवाज़ सुना सकते हैं जबकी वह पीठ फेरकर मुड़ गये हों ( 52 )
सूरह रूम सूरह नम्बर 30 आयत नम्बर 52
➖➖➖➖➖➖
नोट -इसी तरह की आयत सूरह अन नम्ल सूरह नम्बर 27 आयत नम्बर 80 भी है और यह आम आयत है कि मुर्दे नही सुनते
अलबत्ता इससे वह सूरतें मुतसन्नह होंगी जहाँ समाअत की सराहत किसी नस से साबित होगी जैसे -
( 1 ) सही बुखारी हदीस नम्बर 338 मे है कि लोग मुर्दे को जब दफनाकर जब वापस जातें हैं तो वह मुर्दा दफन करके जाने वालों के जूतों की आहट सुनता है
( 2 ) जंगे बद्र के काफिर मुर्दों से नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम का मोअजज़ानह खिताब- सही बुखारी हदीस नम्बर 1307
यह खास हुक्म मे है इस स्थिति के अलावा मुर्दे नहीं सुन सकते
➖➖➖➖➖➖
*नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम दुरूद को खुद नहीं सुनते बल्कि फरिश्ते दुरूद पहुँचाते हैं*
➖➖➖➖➖➖
( 22 ) अब्दुल्लाह इब्ने मसूद रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है ,
नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
अल्लाह के फरिश्ते ज़मीन में सैर करते हैं वह मुझे मेरी उम्मत का सलाम पहुँचाते हैं ।
फज़लुस सलात अलन् नबिय्यि सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम लिल इमाम इस्माईल बिन इस्हाक़ अल क़ाज़ी ( 199-282 हिजरी ), हदीस नम्बर 21
तखरीज -इस्नादह सही
➖➖➖➖➖➖
*क्या क़ब्रों मे मद्फून हस्तियाँ सीढ़ी या वसीलह बनकर , हाजत रवा या मुश्किल कुशा बन सकते हैं ?*
➖➖➖➖➖➖
( 23 ) यह मुशरिकीन अल्लाह के सिवा उनकी इबादत करते हैं जो उन्हें न नफा पहुँचा सके न नुक़सान और कहते हैं कि यह अल्लाह के पास हमारे सिफारशी हैं ( 18 )
सूरह युनुस आयत नम्बर 18
➖➖➖➖➖➖
( 24 ) क्या मैं उसे छोड़कर ऐसो को माबूद बनाऊँ कि अगर रहमान मुझे कोई नुक़सान पहुँचाना चाहे तो उनकी सिफारिश मुझे कुछ भी नफअ न पहुँचा सके और न वह मुझे बचा सकें ( 23 )
सूरह यासीन सूरह नम्बर 36 आयत नम्बर 23
➖➖➖➖➖➖
*कुछ लोगों को यह गलत फहमी है कि ईमान वाले शिर्क नहीं कर सकते और क़ब्रों मे मदफून हस्तियों की इबादत करते है ,जबकि क़ुर्आन मे हे-*
➖➖➖➖➖➖
( 25 ) ( वमा युअमिनु अक्सरुहुम बिल्लाहि इल्ला वहुम् मुशरिकून् ( 106 )
इनमें से अक्सर लोग बावजूद अल्लाह पर ईमान रखने के भी मुशरिक हैं ।
सूरह यूसुफ सूरह नम्बर 12 आयत नम्बर 106
➖➖➖➖➖➖
*क्या कोई शहीद, औलिया या क़ब्रों मे मदफून लोग इसानों के ऊपर सवारी ले सकते हैं ?*
➖➖➖➖➖➖
*शहीद अपने रब के पास जन्नत मे ज़िन्दा हैं , वहाँ से छुटकारा पाकर यह रूहें दुनियाँ मे नही आ सकतीं*
➖➖➖➖➖➖
( 26 ) जो लोग अल्लाह की राह में शहीद किये गये उनको हरगिज़ मुर्दा न समझें बल्कि वह ज़िन्दा है अपने रब के पास रोज़ियाँ दिये जाते हैं ( 169 )
सूरह आल इमरान सूरह नम्बर 3 आयत नम्बर 169
➖➖➖➖➖➖
*ऊपर की आयत की सही तफसीर जो नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने बतलायी है , जिस आयत को पढ़कर बअज़ लोग, लोगों को क़ब्र परस्ती के दलदल मे ढ॔केल देते हैं*
➖➖➖➖➖➖
( 27 ) हज़रते इब्ने मसूद रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने फरमाया हमने भी इसी बारे में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से दरयाफ्त किया था आपने फरमाया
इनकी रूहें सब्ज़ परिन्दों के अन्दर रहती हैं उनके लिए अर्श ए इलाही के साथ क़न्दीलें लटकी हुई हैं
वह रूहें जन्नत मे जहाँ चाहें खाती पीती हैं, फिर उन क़न्दीलों की तरफ लौट आती है
उनके रब ने ऊपर से उनकी तरफ झाँककर देखा और फरमाया
क्या तुम्हें किसी चीज़ की ख्वाहिश है ?
उन्होंने जवाब दिया हम क्या ख्वाहिश करें
हम जन्नत मे जहाँ चाहते हैं घूमते और खाते पीते हैं
अल्लाह ने 3 बार ऐसा किया
जब उन्होंने देखा कि उनको छोड़ा नहीं जायेगा उनसे सवाल होता रहेगा तो उन्होंने कहा
ऐ हमारे रब हम यह चाहते है
कि हमारी रूहों को हमारे जिस्मों में लौटा दिया जाय
ताकि हम दुबारा तेरी राह में शहीद किये जायें
जब अल्लाह तआला यह देखेगा कि उनको कोई हाजत नहीं है तो उनको छोड़ दिया जायेगा ।
सही मुस्लिम, किताबुल इमारह, हदीस नम्बर 1887 ( 4885 )
➖➖➖➖➖➖
*आलम ए बर्ज़ख से निकल कर कोई इस दुनिया मे नही आ सकता , तो आसेब ज़दा पर सवारी कहाँ से लेगा*
➖➖➖➖➖➖
( 28 ) यहाँ तक कि जब उनमें से किसी को मौत आने लगती है तो कहता है ऐ मेरे परवरदिगार ! मुझे वापस लौटा दे ( 99 )
कि अपनी छोड़ी हुई दुनिया मे जाकर नेक आमाल कर लूँ , हरगिज़ ऐसा नहीं होगा , यह तो सिर्फ एक क़ौल है जिसका यह क़ायल है
( वमिव्वराइहिम बर्ज़खुन इला यौमि युब्अषून )
उनके पस ए पुश्त तो एक हिजाब है , उनके दुबारा जी उठने के दिन तक ( 100 )
सूरह अल् मुअमिनून सूरह नम्बर 23 आयत नम्बर 99-100
➖➖➖➖➖➖
नोट -क़ब्रों मे मद्फून लोग तो सवारी नहीं ले सकते अल्बत्तह , जिन्नात और शैतान सवारी लेते है , और कहते है कि मैं फलाँ बाबा हूँ -
➖➖➖➖➖➖
*जिन्न व शैतान के सवारी लेने की दलीलें,*
➖➖➖➖➖➖
सही बुखारी 2038,5652
सही मुस्लिम 2995 ( 7491 )
सुनन इब्ने माजह 3548
➖➖➖➖➖➖
*काहिनों से ग़ैब की खबरें पूछने वालों की 40 दिन तक नमाज़ क़ुबूल नहीं होती*
➖➖➖➖➖➖
( 29 ) सफियह रज़ियल्लाहो ताला अन्हा ने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की एक अहलियह से और उन्होंने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से रिवायत की, कि आपने फरमाया
जो शख्स किसी ग़ैब की खबरें सुनाने वाले के पास आये और उससे किसी चीज़ के बारे में पूछे तो 40 रातों तक उस शख्स की नमाज़ क़ुबूल नहीं होती ।
सही मुस्लिम किताबुल सलाम, बाब तहरीम अल कहानत व इत्यान अल् कहान् , हदीस नम्बर 2230 ( 5821 )
➖➖➖➖➖➖
*कभी -कभी जादूगरों के 100 झूठो मे से एक बात सच कैसे निकल आती है ?*
➖➖➖➖➖➖
( 30 ) उम्मुल मोमिनीन हज़रते आइशा रज़ियल्लाहो ताला अन्हा से रिवायत है मैंने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ! बअज़ बातें हमसे नुजूमी कहते हैं और वह सच निकलती हैं
आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया यह सच बात जिन उसको उचक लेता है और अपने दोस्तों के कान में डाल देता है और 100 झूठ उसमें बढ़ा देता है ।
सही मुस्लिम किताबुल सलाम , हदीस नम्बर ( 2228 ) 5816
तखरीज -सही बुखारी 5762
➖➖➖➖➖➖
*दरगाह और आस्ताने फोह्हाशी का अड्डा हैं*
➖➖➖➖➖➖
( 31 ) जो लोग मुसलमानों में बेहयाई फैलाने के आरज़ूमन्द रहते हैं उनके लिए दुनियाँ और आखिरत में दर्दनाक अज़ाब है, अल्लाह सब कुछ जानता है और तुम कुछ भी नहीं जानते ( 19 )
सूरह अल नूर सूरह नम्बर 24 आयत नम्बर 19
➖➖➖➖➖➖
*दरगाहों -आस्तानो पर बेपार्दगी होती है*
➖➖➖➖➖➖
( 32 ) इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने बयान किया कि अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह की हदीस से ज़्यादह सग़ीरह गुनाहों से मुशाबह मैंने और कोई चीज़ नहीं देखी ••••••अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से नक़्ल किया है
अल्लाह ताला ने इँसानों के मामले मे ज़िना में से उसका हिस्सा लिख दिया है, जिससे वह लामुहालह दो-चार होगा
पस आँख का ज़िना देखना है
ज़ुबान का ज़िना बोलना है
दिल का ज़िना यह है कि वह ख्वाहिश और आरज़ू करता है
फिर शर्मगाह इस ख्वाहिश को सच्चा करती हैं या झुठला देती है ।
सही बुखारी, किताबुल इस्तीज़ान , हदीस नम्बर 6243
तखरीज -इतराफ फी , सही बुखारी 6612
सही मुस्लिम 6753
सुनन अबू दाऊद 2152
➖➖➖➖➖➖
( 33 ) हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से रिवायत की कि आपने फरमाया
इब्ने आदम के मुताल्लुक़ ज़िना में से उसका हिस्सा लिख दिया गया है वह लामुहालह उसको हासिल करने वाला है
पस दोनों आँखें उनका ज़िना देखना है
और दोनों कान उनका ज़िना सुनना है
और ज़ुबान उसका ज़िना बात करना है
और हाथ उसका ज़िना पकड़ना है
और पाँव उसका ज़िना चलकर जाना है
और दिल तमन्ना रखता है और ख्वाहिश करता है
और शर्मगाह उन तमाम बातों की तस्दीक़ करती है या उसकी तकज़ीब करती है ।
सही मुस्लिम, किताबुल क़द्र , हदीस नम्बर 2657 ( 6754 )
➖➖➖➖➖➖
*दरगाहों ,आस्तानो पर ग़जेड़ियों , चर्सियों की भीड़ रहती है जबकि हर नशा आवर चीज़ हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 34 ) हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( कुल्लु मुस्किरिन खमरुन व कुल्लु खमरिन हराम )
हर नशाआवर चीज़ शराब है और हर शराब हराम है ।
सुनन इब्ने माजह हदीस नम्बर 3390
तखरीज -इस्नादह हसन
जामेअ तिर्मिज़ी 1864
➖➖➖➖➖➖
( 35 ) हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
( कुल्लु मुस्किरिन हरामुन वमा अस्करा कसीरुहू , फक़लीलुहू हराम )
हर नशाआवर चीज़ हराम है, और जिस चीज़ की ज़्यादा मिक़दार से नशा आए उसकी थोड़ी मिक़दार भी हराम है ।
सुनन इब्ने माजह हदीस नम्बर 3392
तखरीज -सही
➖➖➖➖➖➖
*क़व्वालियों का रद्द*
➖➖➖➖➖➖
*गाने बजाने को नाम बदलकर क़व्वालियों की शक़्ल मे सुना जाता है, यह अज़ाब नाज़िल होने का ज़रियह है*
➖➖➖➖➖➖
( 36 ) अबू आमिर या अबू मालिक अशअरी रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने बयान किया अल्लाह की क़सम ! उन्होंने झूठ नहीं बयान किया कि उन्होंने नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से सुना आँहज़रत सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
मेरी उम्मत में ऐसे बुरे लोग पैदा हों जाएँगे
जो ज़िनाकारी , रेशम का पहनना, शराब पीना और गाने बजाने को हलाल बना लेंगे
और कुछ मुतकब्बिर क़िस्म के लोग पहाड़ की चोटी पर चले जाएंगे
चरवाहे उनके मवेशी सुबह व शाम लाएँगें और ले जाएंगे
उनके पास एक फक़ीर आदमी अपनी ज़रूरत लेकर जाएगा तो वह टालने के लिए उससे कहेंगे कि कल आना लेकिन अल्लाह ताला रात ही को उनको हलाक कर देगा , पहाड़ को गिरा देगा
और उनमें से बहुत सों को क़यामत तक के लिए बन्दर और सुअर की सूरतों में मस्ख कर देगा ।
सही बुखारी, किताबुल अश्रबह, हदीस नम्बर 5590
तखरीज -सुनन अबू दाऊद 4039
➖➖➖➖➖➖
*ढोल ( अल कूबह ) हराम है*
➖➖➖➖➖➖
( 37 ) हज़रते इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि वफद अब्दुल क़ैस के लोगों ने कहा, ऐ अल्लाह के रसूल ! हम किस चीज़ में पियें ? आपने फरमाया
कद्दू के बरतन , तारकोल के बरतन और लकड़ी के बरतन में मत पियो
अपने मश्कीज़ो में नुबैज़ बनाया करो
उन्होंने कहा, ऐ अल्लाह के रसूल ! अगर मश्कीज़ो मे होते हुए भी उसमें शिद्दत आ जाए तो ? आपने फरमाया उसमें मज़ीद पानी डाल लिया करो
उन्होंने कहा ऐ अल्लाह के रसूल ! तो आपने तीसरी या चौथी बार फरमाया उसे बहा डालो फिर फरमाया
अल्लाह ताला ने मुझपर हराम फरमाया है या कहा •••••हराम की गयी हैं ••••••शराब , जुआ और कूबा और फरमाया हर नशा देने वाली चीज़ हराम है ।
सुफियान सौरी रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं मैंने अली बिन बज़ीमह से कूबह की वज़ाहत पूछी तो उन्होंने कहा इससे मुराद ढ़ोल है ।
सुनन अबू दाऊद हदीस नम्बर 3696
तखरीज -इस्नादह सही
➖➖➖➖➖➖
*क़व्वाली सुनना लहु व लोअब का काम है*
➖➖➖➖➖➖
*लहुवल हदीस की तफसीर*
➖➖➖➖➖➖
( 38 ) सैय्यिदिना इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने
( वमिनन्नासि म॔य्यश्तरी लहुवल हदीस )
की तफसीर करते हुए फरमाया कि इससे मुराद गाना बजाना और इससे मिलती -जुलती चीज़ें हैं ।
आदाबुल मुफ्रिद लिल इमाम बुखारी हदीस नम्बर 786
तखरीज -सही
*क़व्वालियों में शिर्किया अश्आर पढ़े जाने की मज़म्मत*
*क़व्वाल नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की शान मे या दूसरे औलिया की शान में नाहक़ ग़ुलू करता है*
( 39 ) हज़रते इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने हज़रते उमर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह को मिम्बर पर यह कहते हुए सुना था कि मैंने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से सुना आप ने फरमाया
( ला तुत्रूनी कमा अत्रतिन्नसारब्ना मर्यम , फइन्नमा अना अब्दुहू , वलाकिन् क़ूलू : अब्दुल्लाहि वरसूलुह )
मुझे मेरे मर्तबे से ज़्यादह न बढ़ाओ , जैसे ईसा बिन मरयम अलैहिस्सलाम को नसारा ने उनके मर्तबे से ज़्यादह बढ़ा दिया है
मैं तो सिर्फ अल्लाह का बन्दह हूँ
इसलिए यही कहा करो कि
मैं अल्लाह का बन्दह और उसका रसूल हूँ ।
सही बुखारी, किताबु अहादीसिल् अम्बिया, हदीस नम्बर 3445
*इल्मे ग़ैब पर ग़ुलू करने पर नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम का छोटी बच्चियों को तम्बीह करना*
( 40 ) रुब्बै बिन्ते मऊज़ रज़ियल्लाहो ताला अन्हा ने बयान किया कि जिस रात मेरी शादी हुई थी नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम उसकी सुबह को मेरे यहाँ तशरीफ लाए और मेरे बिस्तर पर बैठे जैसे अब तुम यहाँ मेरे पास बैठे हुए हो
चन्द बच्चियाँ दफ बजा रहीं थी और वह अश्आर पढ़ रहीं थी जिनमें उनके उन खानदान वालों का ज़िक्र था जो बद्र की लड़ाई मे शहीद हो गये थे
उन्हीं मे एक लड़की ने यह मिसरअ भी पढ़ा कि
हममें नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम हैं जो कल होने वाली बात को जानते हैं
नबी अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया
यह न पढ़ो बल्कि जो पहले पढ़ रही थीं वही पढ़ो ।
सही बुखारी, किताबुल मग़ाज़ी , हदीस नम्बर 4001
तखरीज -सुनन अबूदाऊद 4922
सुनन इब्ने माजह 1897
*जिसने तावीज़ लटकाया उसने शिर्क किया*
( 41 ) सैय्यिदिना उक़्बह बिन आमिर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है कि
एक जमात नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के पास आई आपने 9 अफराद से बैअत ले ली और एक से न ली
उन्होंने कहा ऐ अल्लाह के रसूल ! आपने 9 अफराद से बैअत ले ली और एक को तर्क कर दिया ?
आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया इसने तावीज़ लटकाया हुआ है
उसने अपना हाथ दाखिल किया और तावीज़ काट दिया
फिर आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने उनसे बैअत ले ली और फरमाया
( मन् अल्लक़ा तमीमतन फक़द् अश्रक )
जिसने तावीज़ लटकाया उसने शिर्क किया ।
मुस्नद अहमद, उर्दू तर्जुमा, जिल्द नम्बर 7 ( हफ्तुम ), सफा नम्बर 211 , हदीस नम्बर 17558
तखरीज -क़ाला शुऐब अस्नादह क़वी
अहादीसुल सहीहह, उर्दू तर्जुमा, जिल्द नम्बर 4 , हदीस नम्बर 3122
*दरगाहों के सज्जादा नशीनों का लिबास ज़अफरानी रंग का होता है जो कि हराम है*
हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहो ताला अन्ह ने बयान किया कि नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने मनअ किया था कि कोई महरम वर्स या ज़अफरान से रँगा हुआ कपड़ा पहने ।
सही बुखारी , किताबुल लिबास, हदीस नम्बर 5847
राजेह-सही बुखारी हदीस नम्बर 134
Comments
Post a Comment