*क्या नबी सल्ललल्लाहो अलेहीवसल्लम ने जिन कब्रों को जमीन के बराबर करने का हुक्म दिया था वो मुशरीको की कब्रे थी?* *उलेमा सू के एक एतराज का मुदल्लल जवाब*

*क्या नबी सल्ललल्लाहो अलेहीवसल्लम ने जिन कब्रों को जमीन के बराबर करने का हुक्म दिया था वो मुशरीको की कब्रे थी?*
*उलेमा सू के एक एतराज का मुदल्लल जवाब*
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मजारो के खिलाफ नबी सल्ललल्लाहो अलेहीवसल्लम की ये हदीस पेश की जाती है👇

*"हजरत अली रजि. ने हजरत अबुल हय्याज असदी रजि. से फरमाया कि "तुम्हें उसी काम पर मै भेजता हूँ जिस काम पर अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने मुझे भेजा था वह यह कि किसी बडी ऊंची कब्र को बराबर किये बगैर न छोडो , न किसी मूरत को बगैर मिटाये रहने दो ”*
📚 *सहीह मुस्लिम हदीस-2243,(969)*

इस पर उलेमा सू की तरफ से एतराज किया जाता है कि जिन कब्रो को जमीन के बराबर करने का नबी सल्ललल्लाहो अलेहीवसल्लम ने हुक्म दिया था वो मुशरीको की कब्रे थी।
हालाँकि इस बातिल एतराज की अहले बिद्अत के पास कोई दलील नहीं है क्योंकि इस हदीस में कही भी सराहतन या इशारतन यह मौजूद नहीं कि ये हुक्म मुशरीको की कब्रों के लिए है।
बल्कि यह हुक्म आम यानी सबके लिए है।
लेकिन चूँकि हम हर बात दलील के साथ कहते है इसलिए इसकी भी दलील देंगे कि नबी सल्ललल्लाहो अलेहीवसल्लम का यह हुक्म सबके लिए है
दलील 👇
*"हजरत अम्र बिन अलहारित रजि. से रिवायत है की 'वे हजरत फादालह बिन उबैद रजि. के साथ रोमन साम्राज्य के 'रुदिस' नामक जगह पर थे,वहा पर हमारे एक दोस्त का इंतेक़ाल हो गया तो हजरत फादालह बिन उबैद रजि.ने हमें हुक्म दिया की 'एक कब्र बनाई जाएँ और उसे समतल रखा जाए' और फिर फ़र्माया की 'मेने रसूलुल्लाह  (ﷺ) से सुना की उन्होंने कब्र को जमीन के बराबर रखने का हुक्म दिया'।"*
📚 *सहीह मुस्लिम हदीस-2242,(968)*

इस हदीस मे सहाबी ए रसूल ने खुद साबित कर दिया है कि नबी सल्ललल्लाहो अलेहीवसल्लम का हुक्म सबके लिए है इसलिए तो उन्होंने अपने दोस्त की कब्र को जमीन के बराबर ही रखा। लेकिन इसके बावजूद उलेमा सू अपने पीरो की मजारे बनाते है जो शिर्क और बिद्अत की वजह बनती है।
हालाँकि किसी भी सही या जईफ हदीस से यह साबित नहीं है कि नेक वलीयो,बुजुर्गों की पक्की और ऊँची कब्र बनाना जाईज है बल्कि नबी सल्ललल्लाहो अलेहीवसल्लम ने तो मजारो की सख्त मजम्मत की है
दलील 👇
*"हजरत जाबिर रजि. से रिवायत है की रसूलुल्लाह (ﷺ) ने पुख्ता कब्रे बनाने और और उनपर बैठने और इमारत तामीर करने से मना फ़र्माया है"*
📚 *सहीह मुस्लिम हदीस-2245 (970)*

नबी सल्ललल्लाहो अलेहीवसल्लम के वाजेह फरमान के बावजूद उलेमा सू अपनी जिद से बाज नहीं आते क्योंकि मजारो से इनका धंधा जो चलता है और वो भोले भाले मुसलमानों की गाढी कमाई से अपनी तोंद बढ़ाते रहते है

मेरे बरेलवी भाईयो कब तक इन उलेमा सू के धोके में रहकर अपनी आखीरत बर्बाद करते रहोगें। इसलिए आज से ही तौबा करके कुरआनो सुन्नत की तरफ रूजू करे 

अल्लाह मेरी इस कोशिश को बरेलवी भाईयो की हिदायत का जरिया बना दे और उनको उलेमा सू के चंगुल से निकालकर कुरआनो सुन्नत की तरफ रूजू करने की तौफीक अता फरमाये और हम सभी को मरते दम तक कुरआनो हदीस पर कायम रखे
आमीन

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