क़ुरबानी के जानवर ज़िबाह करने की दुआ*
*क़ुरबानी के जानवर ज़िबाह करने की दुआ*
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*अपनी तरफ से व अपने घर वालों की तरफ से क़ुरबानी करने के लिए कया कहे*
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*7 आदमीयों के शरीक होंने वाले जानवरों की क़ुरबानी करने की क्या दुआ*
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( 1 ) हज़रते जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से रिवायत है उन्होंने फरमाया रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने ईद के दिन 2 मेंढे क़ुरबान किये जब उन्हें क़िब्ला रुख किया तो फरमाया
*( इन्नी वज्जह्तु वज्हिया लिल्लज़ी फतरस्समावाति वल् अर्ज़ा हनीफॅव् वमा अना मिनल् मुश्रिकीन )*
मैं अपना रुख उसकी तरफ करता हूँ जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया , यक्सू होकर और मैं शिर्क करने वालों मे से नहीं हूँ
( सुरह अल इन्आम आयत नम्बर 79 )
*( इन्ना सलाति वनुसुकि वमहयाया वममाति लिल्लाहि रब्बिल आलमीन -162 )*
आप फरमा दीजिए कि बायक़ीन मेरी नमाज़ और मेरी सारी इबादत और मेरा जीना और मेरा मरना ये सब ख़ालिस अल्लाह ही का है जो सारे जहान का मालिक है
*( ला शरीका लहु वबिज़ालिका उमिरतु व अना अव्वलुल मिनल् मुस्लिमीन-163 )*
उसका कोई शरीक नहीं और मुझको इसी का हुक्म हुआ है और मैं सब मानने वालों में से पहला हूँ
( सूरह अल् इन्आम आयत नम्बर 162-163 )
*( अल्लाहुम्मा मिन्का वलका ,अन् मुहम्मदिन व उम्मतिहि )*
ऐ अल्लाह ये जानवर तुझ ही से मिला और तेरे ही लिए क़ुरबान किया
मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम और उनकी उम्मत की तरफ से ।
सुनन इब्ने माजह हदीस नम्बर 3121
तख्रीज-इस्नादह हसन
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नोट-अपनी तरफ से व अपने घर वालों की तरफ से क़ुरबानी करने के लिए कहे
*( अल्लाहुम्मा मिन्का वलका अन •••••फलाॅ व आल ए ••••फलाॅ )*
कहे ।
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( 2 ) हज़रते आइशा रज़ियल्लाहो ताला अन्हा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने हुक्म दिया एक मेंढा लाया जाए जो सींगो वाला हो , पाॅव काले हों , आॅखे काली हों , सीना और पेट भी काला हो , चुनाॅचे वो पेश किया गया तो आपने उसे क़ुरबान किया ।
आपने फरमाया आइशा ! छुरी लाओ , फिर फरमाया इसे पत्थर पर तेज़ करो मैंने ऐसा ही किया , फिर आपने छुरी ली और मेंढे को पकड़ा उसे लिटाया और ज़िबह किया और दुआ की
*( बिस्मिललाहि अल्लाहुम्मा! तक़ब्बल मिन मुहम्मदिंव व आलि मुहम्मदिंव वमिन उम्मति मुहम्मद )*
ऐ अल्लाह मुहम्मद ( सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ) , आल ए मुहम्मद और उम्मत ए मुहम्मद की तरफ से क़ुबूल फरमा ,फिर उसे क़ुरबान कर दिया ।
सुनन अबूदाऊद हदीस नम्बर 2792
तख़रीज-सही मुस्लिम हदीस नम्बर 1967 ( 5091 )
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नोट -
( 1 ) अपनी तरफ से व अपने घर वालों की तरफ से
के लिए कहे
*( बिस्मिललाहि अल्लाहुम्मा तक़ब्बल मिन •••••फलाॅ व आल ए फलाॅ •••••)*
( 2 ) दूसरे आदमी की तरफ से क़ुरबानी का जानवर ज़िबह करने के लिए कहे
*( बिस्मिल्लाहि , अल्लाहुम्मा तक़ब्बल अन ••••••फलाॅ बिन फलाॅ •••••)*
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( 3 ) सईद ने क़तादह से उन्होंने हज़रते अनस रज़ियल्लाहो ताला अन्ह से उन्होंने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से इस हदीस के मानिन्द रिवायत की मगर उन्होंने ये कहा आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम
*( बिस्मिललाहि वल्लाहो अकबर )*
कह रहे थे ।
सही मुस्लिम हदीस नम्बर 1966 ( 5090 )
*7 आदमीयों के शरीक होंने वाले जानवरों की क़ुरबानी करने की दुआ*
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*( 1 ) ( इन्नी वज्जह्तु वज्हिया लिल्लज़ी फतरस्समावाति वल् अर्ज़ा हनीफॅव् वमा अना मिनल् मुश्रिकीन )*
मैं अपना रुख उसकी तरफ करता हूँ जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया , यक्सू होकर और मैं शिर्क करने वालों मे से नहीं हूँ
( सुरह अल इन्आम आयत नम्बर 79 )
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*( 2 ) ( इन्ना सलाति वनुसुकि वमहयाया वममाति लिल्लाहि रब्बिल आलमीन -162 )*
आप फरमा दीजिए कि बायक़ीन मेरी नमाज़ और मेरी सारी इबादत और मेरा जीना और मेरा मरना ये सब ख़ालिस अल्लाह ही का है जो सारे जहान का मालिक है
*( ला शरीका लहु वबिज़ालिका उमिरतु व अना अव्वलुल मिनल् मुस्लिमीन-163 )*
उसका कोई शरीक नहीं और मुझको इसी का हुक्म हुआ है और मैं सब मानने वालों में से पहला हूँ
( सूरह अल् इन्आम आयत नम्बर 162-163 )
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*( 3 ) ( बिस्मिल्लाहि , अल्लाहुम्मा तक़ब्बल अन (फलाॅ बिन फलाॅ )(••••)(••••)(••••)(••••)(••••)(••••)*
शुरू अल्लाह के नाम से ,ऐ अल्लाह क़ुबूल फरमा,( फलाँ बिन फलाँ )(••••)(••••)(••••)(••••)(••••)(••••) की तरफ से ।
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*( 4 ) ( बिस्मिललाहि वल्लाहो अकबर )*
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