*क्या कोई औरत गैर महरम के बिना हज या उम्रा कर सकती है।?*

*क्या कोई औरत गैर महरम के बिना हज या उम्रा कर सकती है।?*
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*जवाब:-*

जो महिला किसी मह्रम को नहीं पाती है जिस के साथ वह सफर कर सके, तो उस पर हज्ज और उम्रा अनिवार्य नहीं है, और वह उसे छोड़ने में माज़ूर है, और उस के लिये बिन मह्रम के हज्ज या किसी और काम के लिए यात्रा करना हराम (निषिद्ध) है। उसे चाहिए कि वह सब्र (धैर्य) करे यहाँ तक कि अल्लाह तआला उस के लिए उस का कोई मह्रम उपलब्ध करादे ताकि उसके साथ वह यात्रा कर सके।

तथा भलाई के रास्ते बहुत हैं, जब मुसलमान व्यक्ति कुछ इबादतों को करने में असमर्थ हो, तो उसे उन इबादतों को करने में संघर्ष करना चाहिए जिन को करने में वह सक्षम है यहाँ तक कि अल्लाह तआला उसे तौफीक़ प्रदान कर दे और वह इबादतें आसान कर दे जिन की वह ताक़त नहीं रखता है।

अल्लाह तआला की अपने ईमान वाले बन्दों पर एक अनुकम्पा और कृपा यह भी है कि जब बन्दा किसी नेकी को करने का पक्का इरादा (दृढ़ संकल्प) कर लेता है किन्तु किसी उज़्र के कारणवश वह उसे नहीं कर पाता है, तो उसे उस को करने वाले का सवाब मिल जाता है। इमाम बुख़ारी
(हदीस संख्या : 4423) ने अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तबूक से लौटते हुये जब मदीना के क़रीब पहुँचे तो फरमाया : "मदीना में कुछ लोग ऐसे हैं कि तुम जो भी रास्ते चले हो और जो भी घाटी तय किये हो वे तुम्हारे साथ थे।" लोगों ने कहा : ऐ अल्लाह के पैगंबर! और वे लोग मदीना में हैं ?! आप ने फरमाया : "वे लोग मदीना में हैं, उन्हें उज्ऱ (मजबूरी) ने रोक दिया।"

स्थायी समिति के विद्वानों का कहना है:

"जिस महिला का कोई मह्रम नहीं है उस पर हज्ज अनिवार्य नहीं है ; क्योंकि मह्रम उस के लिए रास्ते में से है, और रास्ते की ताक़त होना हज्ज के अनिवार्य होने के लिए शर्त है, अल्लाह तआला का फरमान है : "अल्लाह तआला ने उन लोगों पर जो उस तक पहुँचने का सामर्थ्य रखते हैं इस घर का हज्ज करना अनिवार्य कर दिया है।" (सूरत आल-इम्रान: 97)

तथा उस के लिए जाइज़ नहीं है कि वह हज्ज या किसी अन्य काम के लिए यात्रा करे मगर यह कि उस के साथ उस का पति या कोई मह्रम हो ; क्योंकि बुखारी और मुस्लिम ने इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत किया है कि उन्हों ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फरमाते हुये सुना कि : "कोई आदमी किसी (परायी) महिला के साथ एकान्त (तन्हाई) में न हो सिवाय इसके कि उस (महिला) के साथकोई महरम हो, तथा महिला बिना महरम के यात्रा न करे।" इस पर एक आदमी खड़ा हुआ और कहा : ऐ अल्लाह के पैग़म्बर ! मेरी पत्नी हज्ज के लिए निकली है और मैं ने फलाँ जंग में नाम लिखवा रखा है। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: "जाओ और अपनी पत्नी के साथ हज्ज करो।"

यही बात हसन, नखई, अहमद, इसहाक़, इब्नुल मुन्ज़िर और असहाबुर्राय ने कही है, और ऊपर उल्लेख की गयी क़ुरआन की आयत के आधार पर, तथा महिला को बिना पति या मह्रम के यात्रा करने से निषेद्ध की हदीसों के सामान्य अर्थ के साथ यही बात ठीक (शुद्ध) है, जबकि इस विषय में मालिक, शाफेई और औज़ाई ने मतभेद किया है, और उन में से हर एक ने ऐसी शर्त लगाई है जिस पर उन के पास कोई हुज्जत (दलील) नहीं है, इब्नुल मुन्ज़िर कहते हैं : उन्हों ने हदीस के प्रत्यक्ष अर्थ को अस्वीकार कर दिया, और उन में से हर एक ने ऐसी शर्त लगाई है जिस पर उन के पास कोई हुज्जत (तर्क) नहीं है।

"फतावा अल्लज्ना अद्दाईमा लिल-बुहूस अल-इल्मिय्या वल-इफ्ता" (11/90, 91)

तथा उन विद्वानों का कहना है:

अगर वस्तुस्थिति ऐसे ही है जैसा कि उल्लेख किया गया कि -तुम्हारे पति या तुम्हारे किसी मह्रम के लिए तुम्हारे साथ हज्ज के फरीज़ा को अदा करने के लिए यात्रा करना संभव नहीं है- तो जब तक तुम्हारी यह हालत है तुम्हारे ऊपर हज्ज फज़Z नहीं है ; क्योंकि हज्ज के लिए सफर में पति या तुम्हारे किसी मह्रम का साथ में होना तुम्हारे ऊपर हज्ज के अनिवार्य होने में शर्त है, और तुम्हारे लिए हज्ज वगैरह के लिए बिना उस के यात्रा करना हराम है, चाहे वह तुम्हारे भाई की पत्नी और महिलाओं के एक समूह के साथ ही क्यों न हो, विद्वानों के सहीह कथन के अनुसार यही ठीक है ; क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फरमान है : "कोई महिला बिना मह्रम के यात्रा न करे।" (सहीह बुखारी व मुस्लिम) किन्तु अगर तुम्हारा भाई अपनी पत्नी के साथ है तो तुम्हारे लिए उस के साथ यात्रा करना जाइज़ है ; क्योंकि वह तुम्हारा मह्रम है। तथा आप उन नेक कामों में संघर्ष करें जिन के लिए सफर की आवश्यकता नहीं होती है, और सब्र से काम लें, आशा है कि अल्लाह तआला तुम्हारे मामले को आसान कर दे, और तुम्हारे लिए पति या किसी महरम के साथ हज्ज करने का रास्ता आसान कर दे।

"फतावा अल्लज्ना अद्दाईमा लिल-बुहूस अल-इल्मिय्या वल-इफ्ता" (11/96)

और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।.

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