*क्या बुत परस्ती और मजार परस्ती में कोई फर्क है❓*

*क्या बुत परस्ती और मजार परस्ती में कोई फर्क है❓*
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कुरआन शरीफ में सबसे ज्यादा आयते शिर्क और कुफ्र के खिलाफ नाजिल हुई। इसके बावजूद भी कुछ बातिल किस्म के मौलवी भोले भाले मुसलमानों को मजार परस्ती में मुब्तिला कर रखा है।जब कोई मुसलमान बेचारा हिम्मत करके इन मौलवीयो से पुछता है कि जनाब कुरआन में कब्र परस्ती के खिलाफ बहुत सारी आयते है तो यह मक्कार मौलवी बड़ी चालाकी से कह देते है कि वो सब आयते कब्र परस्ती के बारे में नहीं बल्कि बुत परस्ती के बारे में है।और हम कब्र में जो अल्लाह के वली है उनसे दुआ करते है लिहाजा कुरआन की शिर्क वाली आयते हम पर फिट करना जुल्म है। उन के इस ढकोसले से बेचारा भोला भाला मुसलमान मुतमईन हो जाता है और फिर से कब्र परस्ती में मुब्तिला हो जाता है। ऐसे मुसलमान भाई इस मैसेज को पुरा पढ़ें  इंशा अल्लाह सारा मामला साफ हो जायेगा।

यहाँ सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि बुत का मतलब भूत प्रेत या जिन्न नहीं होता है। मुशरीकीने मक्का के यहाँ जब अल्लाह का कोई नेक वली इंतेकाल कर जाता तो वो लोग उस वली की पत्थर की मुर्ती बना लेते थे। इसी को कुरआन में बुत कहा गया है। जैसे कि तफ्सीर इब्ने कसीर में इमाम इब्ने कसीर रहीमहुल्लाह ने इसकी वजाहत करते हुए फरमाया है
*"ये सब बुत दरअसल कौम ए नुह के स्वालेह बुजुर्ग औलिया अल्लाह लोग थे"*
📗तफ्सीर इब्ने कसीर पारा नं-29 आयत नं-21
यहाँ यह बात सबसे ज्यादा गौर करने वाली है कि *उनके बुत भी औलिया अल्लाह के ही थे और आज अहले बिद्अत की बनाई हुई मजारे भी औलिया अल्लाह की है*

अब मै यहाँ मुशरीकीने मक्का और आज के मजार परस्तो की कुछ बातें लिख रहा हूँ जिसे पढ़ने के बाद पता चलेगा कि वाकई दोनों में कोई फर्क नहीं है

*1* उस जमाने में लोग वलीयो के इंतेकाल के बाद उनके पत्थर के बुत बनाते थे और आज वलीयो के इंतेकाल के बाद उनकी पत्थर की मजारे बनाई जा रही है यानी काम वहीं है अंदाज थोड़ा अलग है। हाँलाकि नबी (ﷺ)ने मजार बनाने से सख्त मना फरमाया है
📚सहीह मुस्लिम-2245(970)

*2* वलीयो के बुत बनाने वाले लोग भी अल्लाह पर ईमान रखते थे जैसे कि कुरआन में है-
*"आप(नबी सल्ल)इनसे पूछें, कि तुम को आसमान और जमीन में रिज्क़ कौन देता है?َ(तुम्हारे) कानों और आंखों का मालिक कौन है?ِّऔर बे-जान से जान-दार कौन पैदा करता है और जान-दार से बे-जान कौन पैदा करता है?और दुनिया के कामों का इंतजाम कौन करता है?*
*फौरन कहेंगे कि अल्लाह करता है*
📗सूरह यूनुस आयत-31

इसके बावजूद भी अल्लाह ने उन्हें मुशरीक कहा है क्योंकि उन्होंने अल्लाह के साथ औलिया अल्लाह को भी शरीक कर लिया था
और आज वलीयो के मजार बनाने वाले लोग भी अल्लाह पर ईमान रखते है लेकिन साथ में औलिया अल्लाह को भी शरीक करते है अब उन्हे क्या कहा जायेगा?
इस तरह के ईमान को अल्लाह ने कुरआन शरीफ में कुछ यूँ बयान किया है
*"और उनमें अक्सर लोग अल्लाह पर ईमान रखने के बावजूद भी मुशर्रीक ही है"*
📚सुरह युसूफ आयत-106

*3* मुशरीकीने मक्का वलीयो को अल्लाह समझकर नहीं पुकारते थे बल्कि अल्लाह की तरफ वसीला बनाते थे
*"और जिन लोगों ने उस(अल्लाह)के सिवा औलिया अल्लाह बना रखे है(वो कहते है) कि हम उन की इबादत सिर्फ इसलिए करते है कि ये हमें अल्लाह से करीब कर दे"*
📗सुरह जुमर आयत-3

और आज वलीयो के मजार बनाने वाले उलेमा सू से पुछ कर देख ले वो भी यही कहेंगे कि हम वलीयो को अल्लाह समझकर नहीं बल्कि अल्लाह तक पहुँचने का जरिया बनाते है।
यहाँ उलेमा सू एक यह ढकोलसा देते है कि हम तो मुशरीकीने मक्का की तरह वलीयो की इबादत नहीं करते बल्कि सिर्फ उनसे दुआ करते है हाँलाकि नबी (ﷺ)इस ढकोसले का जवाब देकर गये है
"नबी (ﷺ)ने फरमाया- *दुआ इबादत ही है* तुम्हारे रब ने फरमाया-मुझे पुकारो मैं क़ुबूल करूँगा।(सुरह गाफिर-60)"
📚सुनन अबू दाऊद हदीस-1479

अब बताये क्या बुत परस्ती और मजार परस्ती में कोई फर्क है??
हकीकत में जुल्म कौन कर रहा है? जो लोग कुरआन की शिर्क वाली आयतों को मजार परस्ती पर फिट करते है ये लोग या फिर ये जो बड़ी बड़ी तोंद वाले मजारो परस्त उलेमा सू जो अपने मतलब के लिए आपसे मजार परस्ती करवाकर आपके ईमान और आखिरत को बर्बाद कर रहै है।
मेरे बरेलवी भाईयो अभी भी वक्त है।क्या हम अल्लाह के सामने ऐसा ईमान लेकर जायेगें जिसमें शिर्क की मिलावट होगी?? इसलिए आज ही इन खुरफातों से तौबा करके कुरआनो हदीस की तरफ रूजू करे अल्लाह माफ करने वाला है रहमान है।
अल्लाह रब्बुल आलेमीन से दुआ से दुआ है कि वो मेरी इस हकीर सी कोशिश को मेरे भोले भाले बरेलवीय भाईयो की इस्लाह का जरिया बनाकर उनको कुरआनो सुन्नत की तरफ रूजू करने की तौफीक अता फरमाये और इसको मेरे लिए सद्का ए जारिया बना दे।आमी

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