*हम सिर्फ तेरी ही “इबादत” करते है, और सिर्फ तुझसे ही मदद चाहते है |* *[सुरह फातिहा:1, आयत:4]* *بِسْــــــــــــــــــمِ اﷲِالرَّحْمَنِ اارَّحِيم*

*हम सिर्फ तेरी ही “इबादत” करते है, और सिर्फ तुझसे ही मदद चाहते है |*
*[सुरह फातिहा:1, आयत:4]*
*بِسْــــــــــــــــــمِ اﷲِالرَّحْمَنِ اارَّحِيم*
*हज़रात अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास (रज़ि0) का बयान है कि एक दिन मैं अल्लाह के रसूल मुहम्मद सल्ल0 के पीछे सवारी पर बैठा था कि*
*आप (ﷺ) ने फऱमाया *
*«ऐ बेटे! मैं तुम्हें कुछ बातें सिखाता हूं: अल्लाह को याद रख, अल्लाह तेरी मदद करेगा। अल्लाह को याद रख अल्लाह को अपने सामने पाएगा। जब तुझे कुछ सवाल करना हो, तो सिर्फ अल्लाह से सवाल कर, और जब तुझे मदद की ज़रुरत हो, तो सिर्फ अल्लाह से ही मदद माँग। और अच्छी तहर जान ले कि अगर सारी दुनिया इस बात पर जमा हो जाए कि तुझे किसी चीज़ से फायेदा पहुंचा सके तो वह कभी भी नहीं पहुंचा सकते, हाँ मगर उस चीज़ के साथ जो अल्लाह ने तेरे नसीब में लिख दी है। और अगर सारी दुनिया इस बात पर जमा हो जाए कि वह तुझे किसी चीज़ से नुक्सान पहुंचा सके तो वह कभी भी नहीं पहुंचा सकते लेकिन इतना ही जितना अल्लाह ने तेरे किस्मत में लिख दी है।* *क़लम उठा लिए गए हैं। और सहीफें खुश्क हो चुके हैं।»*
*मुसनद अहमद »1/293, 303, 307*
*मिश्कात » 2/453*
*तिरमिज़ी » 2/84*
*सहीह सुनन तिरमिज़ी »* *2/609-610 » 2516*
*मिश्कात अल मासाबीह » 5302*
*मुसनद अबू याला »*  *2/665*
*मुस्तदरक अल हाकिम »* *3/541-542*
*इमाम तिरमिज़ी ने इस हदीस को हसन-सहीह कहा और*
*इमाम अल अलबानी ने भी इस हदीस हो सहीह कहा |*
*और जिन रावी ने इस हदीस को सहीह कहा*
*इस हदीस में अल्लाह के रसूल सल्ल. ने बड़े प्यार से इब्ने अब्बास रज़ि. को कुछ नसीहत की :*
*(1) पहला नसीहत यह थी कि अल्लाह को याद रख अल्लाह तुझे याद रखेगा। इसका मतलब यह है कि अल्लाह के हक़ और उसके हुकुमो पर अमल करो और उसके मना किए हुए कामों से रुक जाओ। इसका नतीजा यह होगा कि तू अल्लाह की हिफाज़त और अमान में रहेगा। हदीस में आता है कि हज़रत सफाना (रज़ि.) ने रात भर जंगल में रात बिताई और शेर रात भर उनकी हिफाज़त के लिए पहरा देता रहा।*
*उक़बा बिन आमिर रज़ि. ने जब जंगल में आवाज़ लगाई कि आज रसूल सल्ल. की फौज यहाँ ठहरेगी तो सब दरिंदे अपने अपने बच्चों को मुंह में दबाए जंगल से भाग निकले।*
*उसके अलावा जो लोग अल्लाह के हुकुमो पर नहीं चलते उनकी सवारियाँ और उनके नोकर भी उनकी पैरवी से मुंह मोड़ लेते हैं।*

*(2) दूसरा नसीहत यह दी कि तू अल्लाह का ख्याल रख अल्लाह को अपने सामने पाएगा मतलब वह तुम्हारा काम बना देगा, तुम्हारी परेशानिया दूर कर देगा वह तेरा हर वक्त मददगार बना रहेगा। जैसा कि अल्लाह के रसूल सल्ल. ने सौर के गुफा में अबू बक्र रज़ि. से कहा था : घबराओ मत अल्लाह हमारे साथ है।*

*(3) तीसरा नसीहत जो अल्लाह के रसूल सल्ल. ने दि यह है कि जब तू सवाल करे तो सिर्फ अल्लाह से ही कर और मदद मांगे तो अल्लाह से मांग। यही दुआ तो हम नमाज़ की हर रकअत में सूरः फातिहा के अंदर करते हैं कि ऐ अल्लाह हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ से ही मदद मांगते हैं। अल्लहा और बन्दे के बीच कोई गैप और दूरी नहीं इस लिए बन्दे को चाहिए कि बिना किसी वसीले के अल्लाह से मांगे। कि अल्लाह के अलावा कोई फायेदा या नुक्सान पहुंचाने की क़ुव्वत नहीं रखता।*
*अल्लाह ने फरमायाः और अगर अल्लाह तुझे नुक्सान पहुंचाना चाहे तो अल्लाह के अलावा कोई उसे दूर करने वाला नहीं है और अगर अल्लाह तेरे साथ भलाई का इरादा करे कोई रोकने वाला नहीं है।*
*(सूरः यूनुस 107)*

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